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February 16, 2026 10:18 am

बड़ा सवाल : जब 2010 में उड़िया जाति को राजपत्र में शामिल किया गया तो तहसीलदार 2005 में कैसे जारी कर दिया प्रमाण पत्र

बिलासपुर ।भाजपा से महापौर पद के उम्मीदवार की जाति को लेकर कांग्रेस ने घमासान मचा रखा है जबकि भाजपा अपने उम्मीदवार के प्रचार प्रसार में लगी हुई है महापौर चुनाव में कांग्रेस भाजपा उम्मीदवार की पिछड़ी जाति की सूची को लेकर परेशान है । आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है ।बेहतर ए होता जैसे भाजपा अपने उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार में जुटी हुई है ।वैसे ही कांग्रेस को भी अपने उम्मीदवार के लिए प्रचार प्रसार में जुट जाना चाहिए क्योंकि लड़ाई का जवाब लड़ाई से ही देना होगा ।अब महापौर उम्मीदवार पूजा विधानी (एल पद्मजा) का ओडिया जाति का परिपत्र कैसे बन गया .ए जाँच का विषय है .और जाँच होनी भी चाहिए । लेकिन कब तक होगी ये यक्ष प्रश्न है जो भविष्य के गर्भ में है ।ओडिया जाति राजपत्र अधिसूचना में कब आया, किस सन में आया आज चुनाव पर इस पर बहस करने का कोई औचित्य नहीं है.जाति प्रमाण पत्र 2005 में कैसे बन गया? क्या ये सही है या नहीं इस बारे में समय गवाने से अच्छा होगा की जाति प्रमाण पत्र के फेर ना पड़ते हुए कांग्रेस पार्टी को अपने उम्मीदवार को जिताने में पूरी ताक़त लगानी चाहिए ।यही समय का तक़ाज़ा है ।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता अभय नारायण राय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि कठपुतली बने निर्वाचन अधिकारी, एसडीएम सरकार के इशारों पर कांग्रेस के द्वारा लगाई आपत्ति को ख़ारिज कर दिया । उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी एल. पद्मजा के नामांकन पत्र में अनेकों आपत्तियां हैं मगर निर्वाचन अधिकारी मौन होकर उनका खुलेआम समर्थन कर रहे हैं। स्कूटनी के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद नायक ने जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ती जताते हुए लिखित आवेदन प्रस्तुत किया तो निर्वाचन अधिकारी द्वारा लगातार उनके बात को शासन-प्रशासन के दबाव में काटने की कोशिश किया गया। कांग्रेस प्रत्याशी के वकील प्रदीप राजगीर भाजपा प्रत्याशी के द्वारा जमा कराए गए जाति प्रमाणपत्र की कॉपी उपलब्ध कराने का दबाव बनाया तो आरओ द्वारा शाम 5:00 बजे तक समय दिया गया। लेकिन शाम को भाजपा सरकार के दबाव में आकर निर्वाचन अधिकारी द्वारा यह बोलकर आपत्ति को खारिज कर दिया गया कि एल. पद्मजा का जाति प्रमाण पत्र जिसमें उड़िया जाती लिखा हुआ है वह सही है और मान्य है। आपत्ती निरस्त की गई ।

अभय नारायण ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी मूकदर्शक जैसे बैठे रहे और एडीएम से आपत्ती निरस्त करने का आदेश डिक्टेट कराया जिसपर निर्वाचन अधिकारी ने हस्ताक्षर किया। इससे यह पता चलता है कि किस स्तर पर एल. पद्मजा के जाति प्रमाण पत्र को सही साबित करने के लिए शासन और प्रशासन द्वारा निर्वाचन अधिकारी पर दबाव बनाया जा रहा है।

प्रदेश प्रवक्ता श्री राय ने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद नायक द्वारा दो बार आवेदन लगाया गया कि भाजपा प्रत्याशी एल. पद्मजा के नामांकन की पूरी सत्यापित प्रतिलिपि उन्हें उपलब्ध कराया जाए जिसमें आवेदन 27 जनवरी 2025 को और दूसरा आवेदन 29 जनवरी 2025 को लगाया गया था परंतु जाति प्रमाण पत्र को छोड़कर बाकी चीज उपलब्ध कराई गई ।इससे साफ जाहिर होता है कि सिर्फ एल. पद्मजा ही नहीं शासन भी अपने पद के दुरुपयोग और गलतियों को लीपा पोती करना चाहती है।जो लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है .

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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