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October 1, 2026 8:16 pm

युक्तियुक्तकरण-पदोन्नति मामले में कनिष्ठ लेखा परीक्षक निलंबित,कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने की थी निष्पक्ष जांच की मांग

तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई, सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर हुई थी जांच

CBN36 बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट और युक्तियुक्तकरण से जुड़े मामलों में शिकायतों के बाद अब कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है। युक्तियुक्तकरण एवं संशोधित पदोन्नति प्रकरण में अनियमितता की शिकायत की जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश 30 सितंबर 2026 को जारी किया गया।

सुनील कुमार यादव उस समय कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर में कनिष्ठ लेखा परीक्षक एवं विधि खंड प्रभारी के रूप में कार्यरत थे। उनके खिलाफ युक्तियुक्तकरण एवं संशोधित पदोन्नति प्रकरण में अनियमितता की शिकायत सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को प्राप्त हुई थी। शिकायत की जांच तीन सदस्यीय जांच समिति से कराई गई।

जांच रिपोर्ट के बाद जारी हुआ कारण बताओ नोटिस

जारी निलंबन आदेश के अनुसार जांच समिति ने 31 अगस्त 2026 और 23 सितंबर 2026 को अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। संबंधित अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद सुनील कुमार यादव को 24 सितंबर 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उन्होंने 25 सितंबर 2026 को अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन विभाग ने उनके जवाब को संतोषप्रद नहीं पाया।

आदेश में कहा गया है कि प्रथमदृष्टया उनके कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के तहत शासकीय सेवक से अपेक्षित सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता एवं शासकीय कार्य में उच्च आचरण के विपरीत पाए गए हैं। इसे घोर अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना गया है।

नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन

इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुनील कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय सेजेस बहतराई, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दयालबंद, विकासखंड-बिल्हा, जिला बिलासपुर निर्धारित किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। निलंबन आदेश तत्काल प्रभावशील किया गया है।

पांच शिकायतों में उठाए गए थे सवाल

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने पूर्व में पांच अलग-अलग शिकायतें प्रस्तुत की थीं। उन्होंने विभागीय प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाते हुए सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की थी। 9 फरवरी से 4 मई 2026 के बीच प्रस्तुत शिकायतों में अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण, कोटा संबंधी वित्तीय अनियमितता, पदोन्नति, पदस्थापना, वरिष्ठता तथा न्यायालयीन आदेशों के पालन से जुड़े विषय उठाए गए थे।

शिकायतों में संबंधित मूल नस्ती, नोटशीट, पत्राचार, पदोन्नति एवं वरिष्ठता सूची और पदस्थापना संबंधी अभिलेखों के परीक्षण के साथ पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।

पहले तत्कालीन डीईओ पर भी हुई थी कार्रवाई

इससे पहले इसी प्रकरण से जुड़े मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को भी जांच में दोषी पाया गया था। अब कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार यादव के निलंबन की कार्रवाई के बाद जिला शिक्षा विभाग से जुड़े इन मामलों में जवाबदेही का मुद्दा फिर चर्चा में है।

गौरहा बोले- प्रभावित शिक्षकों को मिले उनका वास्तविक हक

अंकित गौरहा ने कहा कि शिकायतों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के साथ लगातार सवाल उठाए गए। जांच हुई और अब कार्रवाई भी हुई है।

उन्होंने कहा कि यह प्रभावित शिक्षकों के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पदोन्नति, पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से जिन शिक्षकों का अधिकार प्रभावित हुआ है, उन्हें उनका वास्तविक हक मिलना चाहिए। पूरे प्रकरण में जिन-जिन स्तरों पर जिम्मेदारी सामने आती है, वहां नियमानुसार जवाबदेही तय होनी चाहिए।

गौरहा ने कहा कि शिकायत से जांच और जांच से कार्रवाई तक प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अब अगला लक्ष्य प्रभावित शिक्षकों को न्याय और उनका वास्तविक अधिकार दिलाना है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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