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September 30, 2026 6:18 pm

खस की पहली फसल से महिलाओं ने कमाए 1.12 लाख रुपये

2.50 एकड़ में 11.20 क्विंटल उत्पादन, खस के बाद हल्दी की खेती भी शुरू

CBN36 रायपुर। सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से जोड़ने की पहल अब नई संभावनाएं पैदा कर रही है। धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड के ग्राम पंचायत परखंदा में ‘धान के कटोरा उत्पादक समिति’ स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर औषधीय एवं सुगंधित फसल खस की खेती शुरू की। समूह ने 2.50 एकड़ क्षेत्र में खस की खेती कर पहली फसल में 11.20 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया। इसके विक्रय से महिलाओं को 1.12 लाख रुपये की आय हुई।

खस की खेती महिलाओं के लिए नया प्रयोग था। उत्पादन और फसल प्रबंधन को लेकर शुरुआती चुनौतियों के बावजूद समूह की महिलाओं ने सामूहिक श्रम, नियमित देखभाल और आपसी सहयोग से खेती को आगे बढ़ाया। पहली फसल से मिली आय ने महिलाओं का उत्साह बढ़ाया और उन्हें कृषि में नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।

औषधीय फसल ने खोले आय के नए रास्ते

खस एक औषधीय एवं सुगंधित पौधा है। इसकी जड़ों से प्राप्त सुगंधित तेल का उपयोग शरबत, पान मसाला, तंबाकू, इत्र, साबुन और सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। इसकी सूखी जड़ों का उपयोग कपड़ों और अन्य वस्तुओं में सुगंध के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी खस का उपयोग होता है।

स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने बचत और ऋण गतिविधियों से आगे बढ़कर सामूहिक उत्पादन, फसल प्रबंधन और विपणन की दिशा में कदम बढ़ाया है। खस की खेती से मिली सफलता ने उन्हें यह भरोसा दिया है कि उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर कृषि आधारित आय को बढ़ाया जा सकता है।

छह एकड़ में मिश्रित वृक्षारोपण

परखंदा ग्राम पंचायत में योजनांतर्गत छह एकड़ क्षेत्र में मिश्रित वृक्षारोपण भी किया गया है। इसका उद्देश्य हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता का संरक्षण करना है। एक ओर वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहा है, वहीं दूसरी ओर औषधीय फसलों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इस तरह परखंदा में आजीविका संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है।

खस के बाद अब हल्दी की खेती

खस की पहली फसल से उत्साहजनक परिणाम मिलने के बाद समूह ने अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है। वर्तमान में महिलाएं खस के साथ हल्दी की खेती भी कर रही हैं। अलग-अलग फसलों को अपनाने से समूह की कृषि आय के विकल्प बढ़ रहे हैं और किसी एक फसल पर निर्भरता कम करने की संभावना बनी है। भविष्य में उत्पादों के मूल्यवर्धन, संगठित विपणन और बाजार से बेहतर जुड़ाव के जरिए आय बढ़ाने के अवसर भी तैयार हो सकते हैं।

परखंदा की महिलाओं की यह पहल केवल 11.20 क्विंटल खस उत्पादन और 1.12 लाख रुपये की आय तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण महिलाओं के खेती में नए प्रयोग, सामूहिक प्रयास और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की मिसाल है। खस की खेती से शुरू हुआ यह प्रयास अब महिलाओं के लिए नए अवसरों और आत्मविश्वास का आधार बन रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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