खेती ने पकड़ी नई रफ्तार, खेत से बाजार तक बदल रही तस्वीर
CBN36 रायपुर, 12 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय से ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार की पहल से राज्य की कृषि अब अपनी पारंपरिक पहचान से आगे बढ़ रही है। बेहतर उत्पादन के साथ आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधाओं, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच को बढ़ावा देने की कोशिशों ने खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव का माध्यम बनाया है। इसका असर फसल उत्पादन के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।
छत्तीसगढ़ में पारंपरिक धान की खेती के साथ अब अदरक, गेंदा और अन्य फूलों की खेती, बागवानी तथा मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी किसानों की रुचि बढ़ रही है। किसान अब केवल धान की खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नगदी फसलों और अन्य कृषि गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय के नए स्रोत तैयार कर रहे हैं। कई किसान अदरक और फूलों की खेती से प्रति एकड़ लाखों रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं, युवा किसान मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को खेती के साथ जोड़कर कृषि को आय का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक, ऑटोमैटिक रीपर और आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने से श्रम लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार के ढाई वर्षों से अधिक के कार्यकाल में राज्य में खेती के रकबे के साथ उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों के उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बदलाव केवल खेती के रकबे में वृद्धि का परिणाम नहीं है, बल्कि बेहतर बीज, उर्वरक, सिंचाई सुविधाओं और कृषि यंत्रीकरण तक किसानों की बढ़ती पहुंच ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कृषि नीति का एक महत्वपूर्ण पक्ष किसानों की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना भी है। कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ फसल के धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़ी आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं, गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत एक करोड़ तीन लाख 34 हजार क्विंटल से अधिक गन्ने की खरीदी कर 32,955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। फसल बीमा के दायरे में भी खरीफ सीजन में 15.92 लाख से अधिक और रबी सीजन में 2.99 लाख किसानों को शामिल किया गया है।
किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने में कृषक उन्नति योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। खरीफ 2023 से 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि अंतरित की गई है।
धान छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसल है और इसी वजह से प्रदेश को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। हालांकि, अब राज्य सरकार फसल विविधीकरण पर भी जोर दे रही है, ताकि किसान धान के साथ अन्य लाभकारी फसलों का उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकें। फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दे रही है। इसके तहत अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दलहन फसलों के साथ सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल जैसी तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा मक्का, कपास तथा कोदो, कुटकी, रागी और बाजरा जैसे मोटे अनाजों की खेती करने वाले किसानों को भी इस प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा।
किसानों की आय को मजबूत करने और कृषि जोखिम को कम करने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भी महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। योजना के तहत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये सहित अब तक 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।
तकनीक से आसान हो रही खेती
खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और छत्तीसगढ़ के किसान भी इन्हें अपनाने में पीछे नहीं हैं। गांवों में संचालित ‘फार्म मशीनरी बैंक’ के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को किराये पर आधुनिक कृषि मशीनें उपलब्ध हो रही हैं। इससे किसानों की मेहनत और खेती की लागत कम करने में मदद मिल रही है।
‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का विस्तार हुआ है। इससे पानी की बचत के साथ सिंचाई की दक्षता बढ़ रही है। वहीं, पिछले वर्ष 57 हजार से अधिक किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती को अपनाया जाना कृषि के टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बागवानी में बढ़ रही नई संभावनाएं
छत्तीसगढ़ की कृषि विकास यात्रा में बागवानी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पिछले ढाई वर्षों में बागवानी का क्षेत्रफल 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। फल, सब्जी, मसाले और फूलों के साथ तेल पाम तथा बांस जैसी फसलों का विस्तार किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा कर रहा है।
अब कृषि क्षेत्र के सामने चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। किसानों की उपज को बाजार से जोड़ना, बेहतर मूल्य दिलाना और प्रसंस्करण की सुविधाएं विकसित करना भी उतना ही जरूरी है। इसी दिशा में पैक हाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी अधोसंरचनाओं के विकास की तैयारी की जा रही है। इससे खेत में पैदा होने वाली उपज को बेहतर बाजार, मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण से जोड़ने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में कृषि का यह बदलता स्वरूप बताता है कि खेती अब केवल पारंपरिक फसलों के उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन को साथ लेकर किसान आय के नए रास्ते तलाश रहे हैं। खेत से बाजार तक मजबूत होती यह कड़ी आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
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