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September 12, 2026 12:27 am

UCC पर रायशुमारी: आदिवासी परंपराओं से लेकर विवाह-तलाक और संपत्ति के अधिकार तक मंथन

दो दिवसीय बैठक में सामाजिक संगठनों, आयोगों, अधिवक्ताओं और विशेषज्ञों ने रखे सुझाव, लिव-इन संबंधों पर भी हुई चर्चा

CBN36 रायपुर, 11 सितंबर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में गठित उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, आयोगों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से रायशुमारी की। पुराना सर्किट हाउस के सभाकक्ष में 10 सितंबर से आयोजित दो दिवसीय परामर्श बैठक में विवाह और तलाक, उत्तराधिकार एवं विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से मंथन हुआ।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं समिति के सदस्य एम.के. राउत की अध्यक्षता में हुई बैठक में पीपीटी के माध्यम से समान नागरिक संहिता के वर्तमान नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार भी बैठक में मौजूद रहे।

आदिवासी समाज ने परंपराओं के संरक्षण की मांग रखी

गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं और विशिष्ट सांस्कृतिक ताने-बाने के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की मौलिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का औपचारिक अनुरोध समिति के समक्ष किया।

बेटे-बेटी को समान उत्तराधिकार देने पर जोर

राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने लैंगिक समानता की वकालत करते हुए महिला और पुरुष को समान अधिकार दिए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने बेटे और बेटी को संपत्ति में समान उत्तराधिकार, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन तथा संपत्ति और वसीयत से जुड़े स्पष्ट कानूनी प्रावधान किए जाने पर जोर दिया।

लिव-इन संबंधों को स्वीकार नहीं करने की बात

क्रिश्चियन समाज के राजेश जॉन पाल सहित समाज के प्रतिनिधियों ने विवाह को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और अटूट संबंध बताया। उन्होंने कहा कि विवाह ईश्वर द्वारा बनाई गई अटूट जोड़ी है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। प्रतिनिधियों ने लिव-इन संबंधों को सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं किए जाने की बात समिति के सामने रखी।

बच्चों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा पर भी सुझाव

राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने बच्चों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। समिति के सदस्यों ने सभी प्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। समिति ने कहा कि विभिन्न सामाजिक समूहों से मिले सुझावों और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण किया जाएगा, ताकि समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार किया जा सके।

अधिवक्ताओं ने प्रावधानों को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने पर दिया जोर

बैठक में अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता बृजेश पांडेय, अध्यक्ष दिनेश देवांगन, अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारती राठौर ने यूसीसी के प्रावधानों को अधिक कारगर, स्पष्ट और पारदर्शी बनाए जाने के संबंध में सुझाव दिए।

दूसरे सत्र में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा और आशीष बाजपेयी ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपने विचार एवं अभिमत समिति के समक्ष दर्ज कराए। वहीं मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ. कुलदीप सोलंकी, डॉ. सुरभि दुबे और डॉ. के.पी. आजमानी ने भी यूसीसी के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय और सुझाव प्रस्तुत किए।

समिति के अनुसार, परामर्श बैठक में प्राप्त सभी सुझावों का अध्ययन कर उनके सामाजिक, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। इसके आधार पर राज्य में समान नागरिक संहिता के संबंध में आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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