रायपुर। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। मंत्री ने सभी औद्योगिक इकाइयों को 31 जुलाई तक निर्धारित वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने और 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रायपुर के बेबीलॉन कैपिटल में मानसून-2026 के दौरान उद्योगों द्वारा किए जा रहे वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें बड़े और मध्यम उद्योगों के प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।

मंत्री ने कहा कि पर्यावरणीय मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उद्योगों से पीपल, नीम, शिरीष, आम, कटहल सहित स्थानीय और दीर्घायु प्रजातियों के पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और पोर्टल पर समयबद्ध जानकारी दर्ज कराने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने उद्योगों से अपने परिसर और आसपास हरित क्षेत्र विकसित करने, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। साथ ही मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि नवा रायपुर को “पीपल सिटी” के रूप में विकसित करने के लिए विशेष अभियान चल रहा है। आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं सेंध लेक के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण के साथ झील के बीच स्थित तीन एकड़ द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाकर बर्ड आइलैंड विकसित किया जा रहा है।
बैठक में जानकारी दी गई कि इस वर्ष अब तक करीब 22 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। वर्ष 2026 के लिए 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिसे बढ़ाकर 30 लाख से अधिक तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने उद्योगों को प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाने, परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत हिस्से में ग्रीन बेल्ट विकसित करने, पुनर्चक्रित जल से सिंचाई करने और ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली को 24 घंटे संचालित रखने के निर्देश दिए। मंडल ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने से तय होगी।
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