रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में ‘वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना’ का शुभारंभ किया। इसके तहत कर्मचारियों को आकस्मिक जरूरतों के लिए बिना ऊंची ब्याज दर के त्वरित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने योजना का ब्रोशर जारी करते हुए कहा कि शासकीय कर्मचारी राज्य के विकास की रीढ़ हैं। आर्थिक चिंताओं से मुक्त कर्मचारी बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को निजी साहूकारों या महंगे ऋण का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। नई व्यवस्था के जरिए पात्र कर्मचारी सरल और डिजिटल प्रक्रिया से अल्पावधि ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्त विभाग ने इस सुविधा को ई-कोष प्रणाली से एकीकृत किया है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल, पेपरलेस और पारदर्शी होगी, जिससे कर्मचारियों को तेजी से लाभ मिलेगा और सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारी हितों को प्राथमिकता दे रही है। कैशलेस मेडिकल सुविधा के बाद यह दूसरी बड़ी पहल है। उन्होंने बताया कि पायलट चरण के दो माह में 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने पंजीयन कराया, जबकि 27 हजार कर्मचारी इस योजना का लाभ ले चुके हैं। भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर अधिक राशि का ऋण उपलब्ध कराने की भी योजना है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने योजना का स्वागत करते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही जरूरत पूरी होगी और आकस्मिक परिस्थितियों में सम्मानजनक आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
योजना के तहत कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण और सहमति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऋण स्वीकृति और राशि का वितरण किया जाएगा। वित्त विभाग के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।
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