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June 8, 2026 5:57 pm

प्राकृतिक खेती और मिलेट्स को बढ़ावा देने दंतेवाड़ा में शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’

रायपुर, 8 जून। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और लोगों को पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती तथा मिलेट्स (मोटे अनाज) के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा जिले में कृषि भूमि की गुणवत्ता सुधारने और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ प्रारंभ किया जा रहा है।

कृषि विभाग द्वारा तैयार की गई इस कार्ययोजना का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग, पारंपरिक बीजों का संवर्धन तथा प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का स्वरूप देना है। अभियान को जिले के चारों विकासखंडों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

अभियान के तहत ज्वार, बाजरा, रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसी फसलों को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। इन मिलेट्स को ‘श्री अन्न’ और ‘सुपरफूड’ के रूप में पहचान मिली है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ये फसलें कम पानी और कम लागत में उगाई जा सकती हैं तथा सूखा-रोधी भी होती हैं।

पांच चरणों में होगा क्रियान्वयन

योजना के अंतर्गत सबसे पहले मृदा स्वास्थ्य मैपिंग और सॉयल हेल्थ कार्ड व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके बाद रागी, कोदो और कुटकी जैसी पौष्टिक फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और ब्लू-ग्रीन एल्गी उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम हो सके।

इसके अलावा सामुदायिक बीज बैंक और पारंपरिक बीज मंडियों की स्थापना की जाएगी। अभियान के अंतिम चरण में खेतों की मेड़ों पर ग्लिरिसिडिया जैसे हरित खाद प्रदान करने वाले पौधों का रोपण किया जाएगा। इसके लिए एक लाख पौधों के वितरण और रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

135 ग्राम पंचायतों में लागू होगी योजना

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले की 135 ग्राम पंचायतों में अभियान संचालित किया जाएगा। इसके तहत 4,600 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, 4,300 हेक्टेयर में मिलेट्स उत्पादन तथा 40 सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से मिलेट्स आधारित खाद्यान्नों के वितरण और इस क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को भी प्रोत्साहन देने की दिशा में कार्य कर रही है।

किसानों को मिलेगा लाभ

अधिकारियों के अनुसार अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से अगले तीन वर्षों में खेतों में जैविक कार्बन स्तर बढ़ने की संभावना है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की उत्पादन लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। साथ ही दंतेवाड़ा में उत्पादित मिलेट्स के लिए राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर भी विकसित होंगे।

कृषि विभाग का मानना है कि यह पहल केवल खेती की पद्धति में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी, जल, जैव विविधता और किसानों की आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति होने पर दंतेवाड़ा प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि मॉडल के रूप में प्रदेश के लिए उदाहरण बन सकता है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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