बिलासपुर/ CBN 36 । समाज सेवा वं परोपकार की भावना को चरितार्थ करते हुए क्रांति नगर निवासी वरिष्ठ चोपड़ा दम्पति ने देहदान का संकल्प लिया है। जैन समाज के हीरचंदजी चोपड़ा (86 वर्ष) और उनकी धर्मपत्नी कांतादेवी चोपड़ा (82 वर्ष) ने अपने निधन के उपरांत देहदान करेंगे। उनका यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायी और अनुकरणीय है।
इस संकल्प की प्रेरणा उन्हें अपने बड़े भाई स्वर्गीय शांतिलाल चोपड़ा से मिली। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप, निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के उद्देश्य से रायपुर मेडिकल कॉलेज को समर्पित किया गया था। उसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए हीरचंदजी और कांतादेवी ने भी मृत्यु उपरांत मानवता की सेवा मार्ग अपनाने का निर्णय लिया।
उनके इस समाजोपयोगी निर्णय का उनके पुत्र संजय चोपड़ा, सुनील चोपड़ा और संजीव चोपड़ा, पुत्री संगीता व दामाद डॉ. अजयजी ओसवाल ने पूर्ण सहमति के दी।
उनके मित्र अनिलजी टाह, राजेशजी चौकसे तथा अन्य शुभचिंतकों ने चोपड़ा दम्पति के इस निर्णय की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्पद एवं अनुकरणीय कदम बताया है।
चोपड़ा दंपति का मानना है कि देहदान मानवता की सर्वोच्च सेवाओं में से एक है। इसके माध्यम से मेडिकल विद्यार्थियों को शरीर रचना का व्यावहारिक अध्ययन करने तथा चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने में अमूल्य सहयोग प्राप्त होता है। साथ ही समाज में अंगदान एवं देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सेवा-भाव को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम भी है।
चोपड़ा परिवार ने समाज के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस विषय पर सकारात्मक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएँ तथा मृत्यु उपरांत भी मानवता की सेवा के इस महान कार्य से जुड़ने का संकल्प लें।
“जीवन का सबसे बड़ा दान वह है, जो मृत्यु के पश्चात भी मानवता के काम आए।”
चोपड़ा दम्पति का यह संकल्प सेवा, संवेदना और मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी गहरी आस्था का परिचायक है तथा समाज को परोपकार और मानव कल्याण की दिशा में प्रेरित करने वाला एक अनुकरणीय उदाहरण है।
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