
दूसरे राज्यस्तरीय कवि सम्मेलन में 45 कवियों की सहभागिता, ‘प्रबोधिनी कविरत्न पुरस्कार–2026’ से काव्यप्रतिभाओं का सम्मान
CBN36 वर्धा। कविता को अपने समय और समाज से जोड़ते हुए कवि को अपनी मौलिक आवाज़ तलाशनी चाहिए। आसपास के सुख-दुःख, संघर्ष, विसंगतियां, प्रेम, प्रकृति, राजनीति, बाजार, तकनीक और बदलते रिश्तों को संवेदनशील दृष्टि से देखना ही कविता को प्रामाणिक बनाता है। कवि को अपनी रचनाओं के लिए अपने अनुभवों की मिट्टी से ही आवाज़ खोजनी चाहिए। यह विचार ज्येष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक डॉ. राजेंद्र मुंढे ने व्यक्त किए।
प्रबोधिनी प्रेरणा फाउंडेशन, प्रबोधिनी मंच तथा महाराष्ट्र साहित्य समूह के संयुक्त तत्वावधान में श्री संत गाडगेबाबा स्मारक एवं सभागृह, कृष्णनगर, वर्धा में रविवार को दूसरे राज्यस्तरीय कवि सम्मेलन एवं ‘प्रबोधिनी कविरत्न पुरस्कार–2026’ समारोह का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र मुंढे ने की।
डॉ. मुंढे ने कहा कि कविता केवल यथार्थ का दस्तावेज नहीं, बल्कि यथार्थ के अर्थ को खोजने का प्रयास है। साहित्य मनोरंजन का माध्यम मात्र नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, सवालों और परिवर्तन की चेतना को अभिव्यक्त करने वाला प्रभावी माध्यम है। साहित्यकारों को समाज के साथ अपना संबंध मजबूत करते हुए साहित्य के माध्यम से सकारात्मक दिशा देने का निरंतर प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में नगर परिषद वर्धा के अध्यक्ष सुधीर पांगुळ, पूर्व स्किल डेवलपमेंट एंकर सुरेश गणराज, ज्येष्ठ कविवर्य भालचंद्र डंभे, सामाजिक कार्यकर्ता अर्चना भोमले, एडवोकेट मृणालिनी रागीट, प्रबोधिनी प्रेरणा फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रशांत रामटेके, प्रबोधिनी मंच की सचिव रंजना आटे तथा एडवोकेट विठ्ठल लोणकर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
45 कवियों ने दी काव्य प्रस्तुतियां
सम्मेलन में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब 45 कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं की प्रभावी प्रस्तुति दी। अमरावती, वाशिम, मोर्शी, आरमोरी, यवतमाल, छत्रपति संभाजीनगर, लातूर, गोंदिया, चंद्रपुर, भंडारा, नागपुर और वर्धा सहित विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों की सहभागिता से सम्मेलन को व्यापक राज्यस्तरीय स्वरूप मिला।
विजया वसंत लेवटे, पुष्पा दिलीप अतकरे, डॉ. किरण प्रभाकर वाघमारे, वृषाली दिनेश चोरे, सुनीता तागवान, अनिल अमरसिंग जाधव, सुनंदा मधुकर अंभोरे, आरती महेंद्र गायकवाड, मंदाताई सुरेश वाघमारे, चंदू डोंगरवार, डॉ. किरणताई नामदेवराव मोरे-चव्हाण, रोहित बन्सोड, रवि ताकसांडे, संतोष ग्यानीराम मेश्राम, क्षितिजा बापट और गंगाधर शालिग्राम धुवाधपारे सहित अनेक रचनाकारों ने कविता पाठ किया।
भंडारा, नागपुर और वर्धा से भी उषा शिलवंत घोडेसवार, मंगला डहाके, मेघा भांडारकर, कविता कठाणे, हर्षा उद्धव भुरे, प्रा. जयश्री प्रकाश वाघ, राधिका कैलास तितीरमारे, उषाताई राऊत, शुभांगी कपिल डांगरे, प्राजक्ता नितीन वऱ्होकर, कोकिळा सुनील खोदनकर, मुकेश मुकिंद वानखेडे, डॉ. ज्योती जे. नागपूरकर, मनीषा गुरनुले, जिजा प्रदीप मानकर, अरुणा भास्कर भोंडे, डॉ. राजेश चंद्रकांत काळे, सुचिता गोपाळराव कुनघटकर, निलेश वासुदेव गणगे, प्रीती वानखेडे, सरला अजय कापसे, नैना सचिन ठाकरे, निलिमा शंकर मोहमारे, एडवोकेट विठ्ठलराव लोणकर और सुरेश लक्ष्मण सुरजुसे ने सहभागिता की।
कविता प्रस्तुति के साथ सभी सहभागी कवि-कवयित्रियों का सत्कार किया गया। आयोजकों ने बताया कि नवोदित एवं स्थापित रचनाकारों को एक मंच उपलब्ध कराकर उनकी साहित्यिक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक रंजना आटे ने किया। रवि ताकसांडे और हर्षा भुरे ने सूत्रसंचालन किया, जबकि आभार प्रदर्शन एडवोकेट विठ्ठल लोणकर ने किया। आयोजन को सफल बनाने में प्रबोधिनी प्रेरणा फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रशांत ताराचंद रामटेके, प्रबोधिनी मंच महाराष्ट्र साहित्य समूह की संस्थापिका अध्यक्षा नम्रता प्रशांत रामटेके, सचिव रंजना आटे तथा एडवोकेट विठ्ठल लोणकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
विभिन्न जिलों से आए कवि-कवयित्रियों की सहभागिता और विविध विषयों पर प्रस्तुत कविताओं से वर्धा का यह साहित्यिक आयोजन यादगार बन गया। ‘प्रबोधिनी कविरत्न पुरस्कार–2026’ के माध्यम से काव्यप्रतिभाओं को सम्मान और मंच प्रदान करने की पहल को साहित्यप्रेमियों ने सकारात्मक कदम बताया।
प्रधान संपादक




