
छत्तीसगढ़ ।जशपुर जिले में पुलिस विभाग में अनुशासन बनाए रखने के लिए डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने वाले पांच आरक्षकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक आदेश जारी किए हैं। विभागीय जांच पूरी होने के बाद तीन आरक्षकों को सेवा से पृथक कर दिया गया है, जबकि दो अन्य को गंभीर दंड दिया गया है।
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने पुलिस रेगुलेशन के नियम 221(अ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह कार्रवाई की। जांच में पाया गया कि संबंधित आरक्षक लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के आदी थे और उन्हें कई बार अवसर दिए जाने के बावजूद उनके व्यवहार में सुधार नहीं आया।
कार्रवाई के तहत आरक्षक क्रमांक 737 संतोष कुमार राम, आरक्षक क्रमांक 525 नेल्सन तिग्गा और आरक्षक क्रमांक 394 अशोक कुमार एक्का को सेवा से पृथक कर दिया गया है। वहीं आरक्षक क्रमांक 47 इरीमियस कुजूर को एक वेतन वृद्धि के बराबर धनराशि की कमी संचयी प्रभाव से तथा आरक्षक क्रमांक 144 बिंदेश्वर राम को आरक्षक के न्यूनतम वेतनमान में लाने का दंड दिया गया है, जिसका प्रभाव भविष्य की वेतन वृद्धि एवं पेंशन पर भी पड़ेगा।
विभागीय अभिलेखों के अनुसार सेवा से पृथक किए गए तीनों आरक्षक अपने सेवाकाल में कई बार अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे थे। संतोष कुमार राम 13 वर्ष की सेवा में 469 दिन, नेल्सन तिग्गा 17 वर्ष की
वा में 923 दिन तथा अशोक कुमार एक्का 20 वर्ष की सेवा में 1151 दिन तक विभिन्न अवधियों में गैरहाजिर रहे। इन तीनों के विरुद्ध पूर्व में भी कई अनुशासनात्मक कार्रवाइयां की जा चुकी थीं, लेकिन उनके आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है और कर्तव्य के प्रति उदासीनता या स्वेच्छाचारिता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों का जिम्मेदार और अनुशासित होना आवश्यक है। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।इस कार्रवाई को जशपुर पुलिस में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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