
“आज जब देशभर में पुलिस की छवि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती हैं, तब रायगढ़ में एक ऐसी तस्वीर सामने आती है जहां पुलिस वर्दी के पीछे एक संवेदनशील इंसान दिखाई देता है ,एक ऐसा अधिकारी जो एक ओर अवैध नशे के कारोबारियों पर शिकंजा कस रहा है, तो दूसरी ओर भटके हुए युवाओं को नई जिंदगी का रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहा है”
छत्तीसगढ़ ।रायगढ़ पुलिस की भूमिका अक्सर अपराधियों की गिरफ्तारी, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण तक सीमित समझी जाती है। लेकिन रायगढ़ में पुलिसिंग की एक ऐसी तस्वीर उभर रही है, जहां अपराध के खिलाफ सख्ती के साथ-साथ समाज के कमजोर और भटके हुए वर्गों को नई राह दिखाने का प्रयास भी समान प्राथमिकता में है। इस बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस शशि मोहन सिंह।

रायगढ़ में एक ही दिन दो अलग-अलग लेकिन समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि संवेदनशील पुलिसिंग केवल कानून लागू करने का नाम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम है।
दिन की शुरुआत मातृ निलियम संस्था के 129वें दत्तक ग्रहण समारोह से हुई। यहां एसएसपी शशि मोहन सिंह अपनी पत्नी रेखा सिंह और पुत्र ऋभु समर्थ सिंह के साथ पहुंचे। कार्यक्रम में उन्होंने उस दंपत्ति को प्रतीकात्मक रूप से बच्चा सौंपा, जो लंबे समय से संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहा था। यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि उस भावनात्मक क्षण का हिस्सा बनना था, जहां एक बच्चे को परिवार और एक परिवार को नया जीवन मिल रहा था।

इसके बाद एसएसपी सीधे चक्रधरनगर स्थित “नव जीवन” व्यसन मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र पहुंचे। यहां उनकी भूमिका एक पुलिस अधिकारी से अधिक एक मार्गदर्शक और अभिभावक की नजर आई। नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के बीच बैठकर उन्होंने उनके संघर्षों को सुना, उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि समाज उन्हें दूसरा अवसर देने के लिए तैयार है।
रायगढ़ पुलिस इन दिनों ऑपरेशन आघात के जरिए अवैध शराब, गांजा, नशीली दवाओं और प्रतिबंधित इंजेक्शनों के कारोबार पर लगातार कार्रवाई कर रही है। लेकिन एसएसपी शशि मोहन सिंह की सोच केवल गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि नशे के नेटवर्क को तोड़ने के साथ-साथ उन युवाओं को भी बचाना जरूरी है जो किसी कारणवश इसकी चपेट में आ गए हैं।

शशि मोहन सिंह बड़े ही साफ़ शब्दों में कहते हैं कि नशा केवल व्यक्ति का स्वास्थ्य नहीं बिगाड़ता, बल्कि परिवारों को तोड़ता है, सामाजिक सम्मान छीनता है और अपराध को जन्म देता है। इसलिए पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपराधी तक पहुंचने की नहीं, बल्कि पीड़ित को फिर से समाज की मुख्यधारा में लाने की भी है।
यही कारण है कि रायगढ़ पुलिस अब नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार के अभियान के रूप में देख रही है। पुनर्वास, मार्गदर्शन और रोजगार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयास इसी सोच का हिस्सा हैं।

आज जब देशभर में पुलिस की छवि को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती हैं, तब रायगढ़ में एक ऐसी तस्वीर सामने आती है जहां पुलिस वर्दी के पीछे एक संवेदनशील इंसान दिखाई देता है। एक ऐसा अधिकारी जो एक ओर नशे के कारोबारियों पर शिकंजा कस रहा है, तो दूसरी ओर भटके हुए युवाओं को नई जिंदगी का रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहा है।
शायद यही है आधुनिक और जन-केंद्रित पुलिसिंग की असली पहचान जहां कानून का भय अपराधियों के लिए हो और उम्मीद का हाथ समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए।
प्रधान संपादक


