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May 30, 2026 2:57 pm

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों की नई पसंद, लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने का दावा

रायपुर। खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की उर्वरा शक्ति में गिरावट जैसी चुनौतियों के बीच नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक वैकल्पिक उर्वरक के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इनका संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग खेती की लागत कम करने, उत्पादन में सुधार लाने तथा मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार धान उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है। मौजूदा कीमतों के आधार पर केवल इन दोनों उर्वरकों पर प्रति एकड़ लगभग 1900 से 2200 रुपये तक खर्च आता है।

कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर माना जाता है। ऐसे में दो बोरी यूरिया के स्थान पर दो बोतल नैनो यूरिया के उपयोग से खाद पर होने वाले खर्च में बचत संभव है। इसी तरह नैनो डीएपी के उपयोग से भी पारंपरिक डीएपी की मात्रा कम कर लागत में कमी लाई जा सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक नैनो उर्वरकों के सूक्ष्म कण पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं, जिससे पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ती है। इससे फसल की बढ़वार, हरियाली, दानों का भराव और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है। कई कृषि परीक्षणों में 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत भी मिले हैं।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और भूजल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखने, रासायनिक अवशेष कम करने और पर्यावरणीय प्रभाव घटाने में मदद कर सकता है।

कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। रायपुर जिले में वर्तमान में 9,102 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जबकि कुल भंडारित यूरिया 10,732 मीट्रिक टन है। इसी प्रकार डीएपी की उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन तथा कुल भंडारित मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है। विभाग ने बताया कि कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। नैनो उर्वरकों को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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