Explore

Search

May 29, 2026 8:13 pm

कानाफूसी

नाश्ता, भोजन में दो करोड़ खर्च, राजशाही में भी ना होगा

करप्शन का ना ओर है और ना ही कोई छोर। भ्रष्टाचार करने वाला अगर ठान ले, बेईमानी करनी ही तो करके ही रहेगा। बेईमानी का क्या, इसमें ना तो आचार संहिता और ना ही किसी का डर। जब तक पकड़ में नहीं आया तब चालाक और जिस दिन जांच एजेंसी के फंदे में फंस गए उस दिन से तो फिर मत पूछो, क्या-क्या होगा और क्या-क्या भुगतना पड़ेगा। ऐसे वाकये तो छत्तीसगढ़ में ना जाने कितने है। गिनते-गिनते उंगलियां कम पड़ जाएंगी और यकीन के साथ कह सकते हैं, आप थक भी जाएंगे। हमने पहले ही कहा है, बेईमान के लिए सरकारी धन और पब्लिक मनी का कोई मोल नहीं है और ना ही उसे सुरक्षित रखने का दर्द। तभी तो जिसे जब मौका मिला दबाते ही चले गए। ताजा मामला तो और भी चौंकाने वाला है। एसबीआई की अधिकारी और करप्शन ऐसा कि पूछो मत। करप्शन के बाद बहाने भी ऐसे कि जांच एजेंसियों की जांच करते-करते हवा निकल गई। यकीन नहीं करेंगे, नाश्ता, भोजन और ऑफिस के मेंटनेंस में ढाई करोड़ खर्च बता दिया। कागजों में खर्च बताया और पब्लिक मनी जेब में। इसलिए तो अब हवा खा रही जेल में।

अब आ रहा तबादलों का मौसम

मौसम का क्या, सूरज आग उगल रहा है और लोग गर्मी और हीट वेव से परेशान और हलाकान हैं। इस साल की गर्मी ने वाकई परेशान कर दिया है। अब तो यही लग रहा है, मौसम कब करवट बदले और बारिश कब से शुरू हो। बारिश हो तो कुछ राहत मिले। मौसम की चर्चा चल पड़ी है तो एक और मौसम जल्द आने वाला है, जिसकी आहट राजधानी रायपुर में सुनाई देने लगी है। इस मौसम के लिए मौसम विभाग के पूर्वानुमान की जरुरत नहीं पड़ेगी। इस मौसम को कोई और नहीं, राज्य सरकार की लाने वाली है। यह मौसम है, तबादलों का। जी हां, छत्तीसगढ़ में जल्द ही इस मौसम की शुरुआत हो रही है। सत्ता से जुड़े लोगों के लिए इससे अच्छा कोई और मौसम हो ही नहीं सकता। इसमें मान सम्मान से लेकर सब-कुछ मिलता है, जो आप चाहें। बस बोलने या फिर इशारा की देरी रहती है। इशारा समझने वालों की भी कमी नहीं है।

अफीम के बाद अब गांजे की खेती

छत्तीसगढ़ की सियासत में अफीम ने कुछ ज्यादा ही हलचल मचाई थी। दुर्ग से लेकर सरगुजा तक जमकर हवा बनी थी। अफीम को लेकर जिसको जानकारी नहीं थी, वे भी जानने और समझने लगे हैं यह कैश क्रॉप है। पूरे तीन महीने तक अफीम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में दम कर दिया था। हलचल ऐसी कि राजनेता से लेकर किसान तक थर्राने लगे थे। इस बीच इंटरनेट पर सर्च करने वालो की कमी नहीं थी। कुछ ही दिन हुआ है,अफीम नाम की चीज को लोग जेहन से निकाल रहे थे। अफीम को भूले तो गांजा की लहलहाती फसल देखकर लोग चौंक गए। सोशल मीडिया में गांजे की लहलहाती फसल ने सबको चौंकाया। बस फिर क्या था, एक बार फिर लोगों की जेहन में अफीम की याद ताजी हो गई। राहत की बात ये रही, गांजे की खेती में इस बार गांव का ही किसान निकला।

खनिज माफिया,ड्रोन और जीरो टालरेंस

रेत के अवैध परिवहन और खनन करने वाले माफिया पर पूरे राज्य में ताबड़तोड़ब कार्रवाई हो रही है। फिजिकली और तकनीकी दोनों रूप से माफियाओं पर सख्ती बरती जा रही है। जांजगीर चांपा में माफियाओं ने रेत का पहाड़ खड़ा कर दिया था, जिला प्रशासन ने रेत को नदी में बिछा दिया है। अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती के साथ रोक लगाने के लिए सीएम ने सभी कलेक्टर्स को ना केवल हिदायत दी है,वरन जिम्मेदार भी ठहरा दिया है। जीरो टालरेंस के बीच अब उम्मीद की जा रही है, आम लोगों को रेत सहजता के साथ उपलब्ध होगा और अपना आशियाना बनाने का सपना भी साकार होगा।

अटकलबाजी

रेत पर जिस तरह सरकार सख्ती बरत रही है, रेत के खेल में कौन घाटे में रहने वाला है। माफिया या फिर बीच के सौदागार?

छत्तीसगढ़ में जल्द ही तबादलों का मौसम आने वाला है। सबसे ज्यादा सक्रियता किस बंगले में देखी जा रही है। जरा पता करिए नोट गिनने की मशीन तो नहीं लग रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

Advertisement Carousel
CRIME NEWS

BILASPUR NEWS