
कोल डिपो चाहिए या जेल? प्रशासन की बैठक में दिखा सख्त तेवर,पहली बार सिस्टम मोड में दिखा प्रशासन
बिलासपुर।कोयले की अफरा-तफरी, चोरी और अवैध मिश्रण के मामलों ने जब प्रशासन की चौखट पर लगातार दस्तक दी, तब बिलासपुर जिला प्रशासन ने अब अपना सबसे सख्त रुख दिखा दिया है। एक ही थाना क्षेत्र में कोयला अफरा-तफरी के तीन मामलों के दर्ज होने के बाद प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है कि अब “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर कार्रवाई होगी और किसी भी स्तर पर अवैध कारोबार को संरक्षण नहीं मिलेगा।
जिले के कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल और एसएसपी आईपीएस रजनेश सिंह ने सभी वैध कोल डिपो संचालकों की विशेष बैठक लेकर सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि लाइसेंस की आड़ में किसी भी प्रकार का अवैध खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने साफ कर दिया कि जिस उद्देश्य के लिए अनुमति दी गई है, केवल वही कार्य होंगे, अन्यथा डिपो निरस्तीकरण से लेकर आपराधिक कार्रवाई तक की जाएगी।
यह पहली बार माना जा रहा है जब जिला प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से कोयला कारोबार को लेकर इतनी स्पष्ट और कठोर सार्वजनिक लाइन खींची है।
कोल डिपो चाहिए या जेल? प्रशासन की बैठक में दिखा सख्त तेवर
सूत्रों के अनुसार बैठक का माहौल सामान्य औपचारिकता वाला नहीं था। प्रशासन ने संचालकों को सीधे शब्दों में कहा कि शिकायत मिलने पर तत्काल जांच होगी और यदि कोयला चोरी, अवैध भंडारण, मिश्रण या अफरा-तफरी प्रमाणित हुई तो डिपो का लाइसेंस निरस्त करने में देर नहीं लगेगी।

कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल ने कथित तौर पर स्पष्ट कहा कि बिलासपुर में वैध कारोबार को पूरा संरक्षण मिलेगा, लेकिन अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। वहीं एसएसपी रजनेश सिंह ने पुलिस कार्रवाई को और तेज करने के संकेत दिए।
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचने वाले कोयले में गड़बड़ी, गुणवत्ता से छेड़छाड़ और चोरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। प्रशासन को आशंका है कि संगठित तरीके से कोयले की अफरा-तफरी का नेटवर्क सक्रिय है।
हिर्री थाना कार्रवाई ने बढ़ाई हलचल,मिश्रण कर सप्लाई के आरोप में डिपो संचालक गिरफ्तार

प्रशासन की सख्ती का सबसे बड़ा संकेत हिर्री पुलिस की हालिया कार्रवाई से मिला।एसएसपी के निर्देश पर हिर्री पुलिस ने कोयले में मिश्रण कर सप्लाई करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कोल डिपो संचालक को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
पुलिस के अनुसार मामला अपराध क्रमांक 121/2026 के तहत दर्ज किया गया, जिसमें बीएनएस की धारा 316(3), 317(2), 317(4) और 3(5) लगाई गई हैं।
घटना 18 मई 2026 की बताई गई है। जांच के दौरान ब्रज आयरन एंड स्टील लिमिटेड, डिघोरा से जुड़े कोयला सप्लाई नेटवर्क में गड़बड़ी सामने आई। इस मामले में आरोपी राम कुमार आर्य को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
इसके अलावा कोल डिपो संचालक नरेश अग्रवाल के खिलाफ भी कोयला चोरी और अफरा-तफरी के मामले में कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी कर जेल भेजा गया है।इन कार्रवाइयों ने पूरे कोल कारोबार में खलबली मचा दी है।
पहली बार सिस्टम मोड में दिखा प्रशासन
बिलासपुर में लंबे समय से कोयले के अवैध कारोबार की चर्चा होती रही है, लेकिन अक्सर कार्रवाई निचले स्तर तक सीमित रह जाती थी। इस बार फर्क यह है कि जिला प्रशासन और पुलिस नेतृत्व खुद मोर्चे पर दिखाई दे रहे हैं।
कलेक्टर और एसएसपी की संयुक्त रणनीति ने यह संदेश दिया है कि अब केवल एफआईआर दर्ज कर औपचारिकता पूरी नहीं होगी, बल्कि लाइसेंस, परिवहन, स्टॉक और सप्लाई चैन सभी की निगरानी की जाएगी।सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में कई डिपो की जांच, दस्तावेज सत्यापन और स्टॉक मिलान की कार्रवाई भी तेज हो सकती है।
उद्योग जगत भी देख रहा प्रशासन का अगला कदम
कोयला केवल कारोबार नहीं, बल्कि जिले की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की धुरी है। ऐसे में कोयले की चोरी और अवैध मिश्रण का सीधा असर उद्योगों की लागत, गुणवत्ता और राजस्व पर पड़ता है। यही वजह है कि प्रशासन अब इस पूरे नेटवर्क को आर्थिक अपराध की गंभीरता से देख रहा है।
कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह की सख्ती से फिलहाल एक संदेश पूरी ताकत से गया है कोयले के खेल में अब नियम से बाहर जाने वालों के लिए जगह नहीं बचेगी।
प्रधान संपादक


