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May 24, 2026 5:16 pm

बस्तर मॉडल का इनाम! सुंदरराज दिल्ली, तीन वरिष्ठ आइपीएस बनेंगे स्पेशल डीजी

“नक्सल मोर्चे की सफलता के बाद पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल तय,छत्तीसगढ़ पुलिस में मेगा रीस्ट्रक्चरिंग की तैयारी ,तीन स्पेशल डीजी पद सृजन की तैयारी-सूत्र ”

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर लगातार मिली सफलता के बाद अब पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक बस्तर में एंटी नक्सल ऑपरेशन को नई दिशा देने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को केंद्र में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। चर्चा है कि उनकी सेवाएं राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए को दी जा सकती हैं।

दरअसल पिछले कुछ वर्षों में बस्तर में नक्सल नेटवर्क कमजोर करने, लगातार ऑपरेशन चलाने और सुरक्षा रणनीति को जमीनी स्तर तक लागू करने में आईपीएस सुंदरराज पी की सक्रिय भूमिका रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से हाल में बस्तर को नक्सलमुक्ति की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया जाना भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल के संकेत

सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में राज्य पुलिस सेवा में व्यापक तबादले और पदोन्नति आदेश जारी हो सकते हैं। वरिष्ठता और लंबी सेवा अवधि पूरी कर चुके कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारी देने पर मंथन चल रहा है।

इसी कड़ी में 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी शिवराम प्रसाद कल्लूरी, 1995 बैच के प्रदीप गुप्ता और 1996 बैच के विवेकानंद सिन्हा को स्पेशल डीजी रैंक देने की तैयारी की चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि इसके लिए राज्य सरकार जल्द कैबिनेट में प्रस्ताव ला सकती है।

डीजी रैंक के सीमित पद बने अड़चन

वर्तमान में प्रदेश में डीजी रैंक के केवल चार स्वीकृत पद हैं। इनमें डीजीपी अरुण देव गौतम, डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, डीजी पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन पवन देव और जीपी सिंह पदस्थ हैं। पद रिक्त नहीं होने की वजह से वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति लंबे समय से अटकी हुई है।

ऐसे में सरकार अलग से स्पेशल डीजी के तीन पद सृजित कर वरिष्ठ अधिकारियों को प्रमोशन देने पर विचार कर रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इसे पुलिस महकमे का बड़ा प्रशासनिक पुनर्गठन माना जाएगा।

बस्तर फोकस के बाद नई रणनीति

पुलिस मुख्यालय स्तर पर माना जा रहा है कि नक्सल मोर्चे पर आक्रामक रणनीति के बाद अब प्रशासनिक संरचना को भी उसी अनुरूप मजबूत किया जाएगा। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय, इंटेलिजेंस नेटवर्क और विशेष अभियानों के अनुभव वाले अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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