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May 23, 2026 1:25 am

सिविल लाइन के दो हाईप्रोफाइल केसों ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती, निष्पक्ष जांच पर टिकी शहर की नजर

“एक मामले में कोर्ट के आदेश पर FIR, दूसरे में भाजपा नेत्री प्रकरण में 1.57 करोड़ कैश ट्रांजैक्शन की चर्चा, दुष्कर्म और ठगी मामले में आर्थिक एंगल से भी जांच संभव,दूसरे मामले में 1.20 लाख का मामला 3 करोड़ 14 लाख में बदला ,दोनों कहानी कैश की ,जांच अधिकारी भी सवालों के घेरे में दोनों मामलों की समानताओं को लेकर शहर में सवाल, एसएसपी की निष्पक्षता पर जनता की उम्मीद कायम”

बिलासपुर। शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दर्ज दो अलग अलग हाईप्रोफाइल मामलों ने इन दिनों पूरे शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। दोनों मामलों की प्रकृति अलग होने के बावजूद इनके कई पहलुओं में समानता बताई जा रही है, जिसे लेकर आम लोगों से लेकर कानूनी जानकारों तक के बीच बहस छिड़ गई है। चर्चा यह भी है कि जांच से जुड़े अधिकारी और आला अफसर भी इन समानताओं से भलीभांति वाकिफ हैं।

पहला मामला शहर के एक प्रतिष्ठित इंजीनियर से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कोर्ट के आदेश पर अपराध क्रमांक 456/2026 दर्ज हुआ था।मामले में आरोपी को न्यायालय से जमानत भी मिल चुकी है। वहीं दूसरा मामला भाजपा से जुड़ी एक महिला नेत्री का है, जिसमें दुष्कर्म, ठगी और करोड़ों के कथित नकद लेनदेन ने जांच को नया मोड़ दे दिया है।

भाजपा नेत्री केस में करोड़ों के कैश ट्रांजैक्शन पर उठे सवाल

भाजपा नेत्री से जुड़े मामले में 1 करोड़ 57 लाख रुपये के कथित कैश ट्रांजैक्शन की चर्चा अब जांच का बड़ा विषय बन गई है। मामले में यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी नकद राशि का स्रोत क्या था, क्या उसका कोई वैध दस्तावेजी रिकॉर्ड मौजूद है और क्या आयकर नियमों का पालन किया गया था।

मामले में आरोपी संजय सिंह की ओर से भी वीडियो जारी कर महिला पर लगभग 80 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। आरोपी का दावा है कि पिछले एक वर्ष से उसकी महिला से न तो मुलाकात हुई और न ही बातचीत। साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल, चैट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग भी की गई है।

इधर कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि इतने बड़े कैश लेनदेन के दावे सामने आते हैं तो जांच केवल आपराधिक पहलुओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आयकर और वित्तीय जांच एजेंसियों की भूमिका भी अहम हो सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि इतनी बड़ी रकम नकद दी गई तो उसका लेखा-जोखा किस रूप में मौजूद है और संबंधित पक्षों ने आयकर रिटर्न में उसका उल्लेख किया या नहीं।यहां ए भी चर्चा में है कि महिला द्वारा इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कितना किया जा रहा था ,ए भी जांच का विषय है और है तो इनकम का सोर्स भी जाँच के दायरे में है ।

दोनों मामलों में समानता की चर्चा

शहर में चर्चा इस बात की भी है कि दोनों मामलों में आरोपों का पैटर्न लगभग एक जैसा बताया जा रहा है। यही वजह है कि लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि यदि दोनों मामलों की जांच एक ही अधिकारी के पास रही तो विवाद और गहरा सकता है।

हालांकि इन तमाम दावों और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। लेकिन लगातार हो रही चर्चाओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

एसएसपी रजनेश सिंह की निष्पक्ष छवि पर टिकी उम्मीद

बिलासपुर एसएसपी आईपीएस रजनेश सिंह की छवि एक सख्त और निष्पक्ष अधिकारी की रही है। अपनी कार्यशैली के कारण उन्होंने आम लोगों के बीच भरोसा कायम किया है। यही वजह है कि अब शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन दोनों संवेदनशील मामलों में पुलिस किस तरह आगे बढ़ती है।

शहर में यह मांग भी उठ रही है कि दोनों मामलों की जांच किसी स्वतंत्र या दूसरे अधिकारी से कराई जाए, ताकि निष्पक्षता को लेकर किसी प्रकार का संदेह न रहे। लोगों का मानना है कि हाईप्रोफाइल मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता ही पुलिस की विश्वसनीयता को बनाए रख सकती है।

फिलहाल सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ये दोनों मामले कानूनी जांच से ज्यादा सार्वजनिक बहस का मुद्दा बन चुके हैं। अब देखना यह होगा कि जांच एजेंसियां तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सच को किस तरह सामने लाती हैं।लोगो का कहना है कि इस मामले को वरिष्ठ अधिकारियो को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए ताकि पुलिस का आम जनमानस पर भरोसा बढ़ सके ।

सूत्र बताते हैं कि भाजपा नेत्री से दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और करोड़ों की ठगी के चर्चित मामले में अब कथित नकद लेनदेन भी जांच के दायरे में आ गया है। झारखंड के रांची निवासी कारोबारी संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद करीब 1 करोड़ 57 लाख रुपये नकद भुगतान के दावे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस फिलहाल मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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