
कजरी की सफलता के बाद एसएसपी रायगढ़ की नई पहल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी की थी सराहना

“एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा फिल्म में फर्जी लिंक, ओटीपी साझा करना, स्क्रीन शेयरिंग ऐप, केवाईसी अपडेट, सोशल मीडिया स्कैम जैसे मामलों को वास्तविक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है,फिल्म का मुख्य संदेश डिजिटल दुनिया में जागरूकता ही सुरक्षा है”

रायगढ़।छत्तीसगढ़ की फ़िल्म इंडस्ट्रीज में शशि मोहन सिंह जाना पहचाना नाम हैं ,जितने अच्छे कलाकार हैं उससे कई गुना अच्छे पुलिस अधिकारी हैं उन्हें परिचय की ज़रूरत नहीं है उनकी कई छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा चुकी हैं,मसलन सुपर हिट रही है ,ये कह सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके एसएसपी रायगढ़ आईपीएस शशि मोहन सिंह एक बार फिर कजरी के बाद सामाजिक सरोकार से जुड़ी अपनी नई शॉर्ट फिल्म ख़ौफ़ – द डिजिटल वॉर के साथ दर्शकों के सामने आ रहे हैं। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 4 अप्रैल को जशपुर के विशिष्ट कम्युनिटी हॉल में रात्रि 8:00 बजे भव्य रूप से विमोचित की जाएगी।कार्यक्रम मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या देवी साय की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होगा।
पहचान और उपलब्धियों का मजबूत आधार
एसएसपी शशि मोहन सिंह का नाम छत्तीसगढ़ में एक सशक्त रचनात्मक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हो चुका है। पुलिस सेवा के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर आधारित कई प्रभावशाली शॉर्ट फिल्में दी हैं, जिन्हें दर्शकों ने व्यापक सराहना दी है।

हाल ही में उनकी निर्मित फिल्म कजरी को भी लोगों ने भरपूर प्रेम दिया। इस फिल्म की विशेषता यह रही कि स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपस्थित होकर फिल्म देखी और इसकी सराहना की। यह उपलब्धि शशि मोहन सिंह के रचनात्मक कार्यों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
नई फिल्म, बड़ा संदेश

इसी कड़ी में उनकी नई फिल्म ख़ौफ़ – द डिजिटल वॉर समाज में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास है।फिल्म में एसएसपी शशि मोहन सिंह स्वयं एक स्कूल शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं, जो साइबर फ्रॉड का शिकार बनता है। यह किरदार आम नागरिकों की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है और फिल्म का केंद्रीय बिंदु है।
साइबर अपराधों की सच्चाई

डिजिटल युग में जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं अपराध के तरीके भी बदल गए हैं। अपराधी खुद को पुलिस, बैंक, आरबीआई या अन्य एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और ठगी करते हैं।
फिल्म में फर्जी लिंक, ओटीपी साझा करना, स्क्रीन शेयरिंग ऐप, केवाईसी अपडेट, सोशल मीडिया स्कैम जैसे मामलों को वास्तविक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है।फिल्म का मुख्य संदेश डिजिटल दुनिया में जागरूकता ही सुरक्षा है।
स्थानीय प्रतिभाओं को मंच

टेक 3 स्टूडियोज़ के बैनर तले निर्मित इस फिल्म में रायपुर, दुर्ग, कोरबा और जशपुर के स्थानीय कलाकारों को प्रमुखता दी गई है, जिससे यह फिल्म सामाजिक जागरूकता के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान करती है।फिल्म के डीओपी अनुज कुमार हैं। स्क्रीनप्ले तोरण राजपूत एवं संवाद घनश्याम द्वारा लिखे गए हैं।
कलाकारों में एसएसपी शशि मोहन सिंह के साथ आरवी सिन्हा, दीपा महंत, राम प्रकाश पाण्डेय, ऋभु समर्थ सिंह, कुंदन सिंह, प्रवीण अग्रवाल, विजय सिंह राजपूत, अंकित पांडे, आकर्ष, मनीषा, वंशिका गुप्ता सहित अन्य शामिल हैं।
जागरूकता के साथ विश्वास का संदेश

फिल्म में छत्तीसगढ़ पुलिस, साइबर सेल की कार्यप्रणाली, शिकायत प्रक्रिया और त्वरित कार्रवाई को भी यथार्थ रूप में दर्शाया गया है, जिससे लोगों में विश्वास और सतर्कता दोनों का संदेश जाता है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। यह फिल्म लोगों को जागरूक करने और उन्हें सतर्क रहने के लिए प्रेरित करने का माध्यम है।

ख़ौफ़ – द डिजिटल वॉर केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज को डिजिटल अपराधों के प्रति सचेत करने का एक प्रभावी अभियान है, जो मनोरंजन के साथ-साथ एक मजबूत सामाजिक संदेश भी देता है।

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