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February 16, 2026 12:55 am

कमिश्नर प्रणाली के बाद राजधानी में सख्ती: नाइट लाइफ़ पर लगाम, अपराध नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम

छत्तीसगढ़ ।राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस की सक्रियता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। वर्षों से यह आरोप लगते रहे हैं कि वीआईपी रोड सहित शहर के कई इलाकों में क्लब, बार, ढाबा, होटल और रेस्टोरेंट देर रात तक खुले रहते हैं और इन गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी का अभाव रहा है। इन आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन इतना तय है कि कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद कमिश्नर डॉ संजीव शुक्ला के निर्देश पर अब इन पर नियंत्रण की गंभीर कोशिश शुरू हो चुकी है।

इसी क्रम में राजधानी पुलिस ने रायपुर के सभी होटल, ढाबा, बार, क्लब और रेस्टोरेंट संचालकों की एक अहम बैठक आयोजित कर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने दो टूक कहा है कि रात 12 बजे तक सभी प्रतिष्ठान अनिवार्य रूप से बंद कर दिए जाएं। 12 बजे के बाद न तो कोई ग्राहक मौजूद होना चाहिए और न ही किसी प्रकार की बिलिंग की अनुमति होगी।

पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्रतिष्ठान के लाइसेंस को निरस्त करने की सिफारिश भी की जा सकती है। इसके साथ ही निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए इन सभी प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाने की बात कही गई है।

अपराध की जड़ पर प्रहार की कोशिश

रायपुर के नए कमिश्नर आईपीएस डॉ संजीव शुक्ला का मानना है कि देर रात तक चलने वाले क्लब, बार और ढाबे न केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती बनते हैं, बल्कि असामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं। शराब, तेज़ संगीत, झगड़े, मारपीट और कई बार गंभीर अपराधों की शुरुआत इन्हीं स्थानों से होती रही है। ऐसे में इन गतिविधियों पर समयबद्ध नियंत्रण अपराध रोकथाम की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

डॉ. संजीव शुक्ला की सख्त प्रशासनिक पहल

पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के नेतृत्व में राजधानी पुलिस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कानून-व्यवस्था के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमिश्नर प्रणाली का उद्देश्य त्वरित निर्णय और प्रभावी नियंत्रण है, और हालिया निर्देश उसी नीति को दर्शाते हैं। डॉ. शुक्ला पहले भी साफ कर चुके हैं कि नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य होगा, चाहे वह आम नागरिक हो या रसूखदार कारोबारी।

अपराध की रोकथाम पर फोकस

पुलिस का मानना है कि देर रात तक खुलने वाले प्रतिष्ठानों के आसपास कई बार असामाजिक गतिविधियां सामने आती रही हैं। शराबखोरी, विवाद, मारपीट और अन्य अपराधों की घटनाओं को रोकने के लिए समयबद्ध नियंत्रण आवश्यक है। ऐसे में यह कदम अपराध की जड़ तक पहुंचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।डॉ शुक्ला की यह पहल सराहनीय मानी जा रही है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता नियमों के निष्पक्ष और निरंतर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि निर्देशों का पालन सख्ती से कराया गया, तो राजधानी को अपराध नियंत्रण की दिशा में ठोस लाभ मिल सकता है।कमिश्नर प्रणाली के बाद राजधानी पुलिस की यह कार्रवाई संकेत देती है कि रायपुर में अब कानून-व्यवस्था को लेकर ढिलाई नहीं, कार्रवाई की नीति अपनाई जा रही है।

जमीनी अमल पर टिकी सफलता

लेकिन इसकी असली परीक्षा ज़मीन पर होगी। यदि नियमों का पालन बिना भेदभाव के कराया गया और कार्रवाई केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रही, तो राजधानी में अपराध नियंत्रण की दिशा में ठोस बदलाव संभव है। रायपुर को सुरक्षित और अनुशासित शहर बनाने के लिए ऐसे निर्णयों का निरंतर और ईमानदार क्रियान्वयन आवश्यक है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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