रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने डीएसपी कल्पना वर्मा को सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई कारोबारी दीपक टंडन की ओर से की गई शिकायत के बाद हुई है। कारोबारी दीपक टंडन ने डीएसपी कल्पना वर्मा पर प्यार में फंसाकर करोड़ों ऐंठने और नक्सलियों की जानकारी को लीक करने का आरोप लगाया था।

शिकायत की प्राथमिक जांच के बाद सरकार ने मामले को गंभीर मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय पुलिस मुख्यालय या शासन द्वारा निर्धारित स्थान रहेगा। साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का प्रावधान रहेगा। 2 सप्ताह पहले इस कंट्रोवर्सी की जांच रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी गई थी कारोबारी दीपक टंडन ने आरोप लगाया है कि साल 2021 से महिला डीएसपी ने कथित तौर पर ‘लव ट्रैप’ के जरिए उनसे करीब 2.5 करोड़ रुपए की वसूली की। आरोपों में करीब 2 करोड़ रुपए कैश, एक लग्जरी कार, 12 लाख की डायमंड रिंग, 5 लाख रुपए के सोने के गहने और अन्य महंगे गिफ्ट्स शामिल बताए गए हैं।कारोबारी का दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कार और गहने अभी तक उसे वापस नहीं मिले हैं। उसने DSP कल्पना से उन्हें वापस करने के लिए बार-बार कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। कल्पना की वजह से उसे करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।कारोबारी टंडन ने अपने बयान में बताया, कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने अपने भाई के नाम पर होटल खोलने के बहाने कारोबारी से रुपए लिए। कारोबारी ने अपनी शिकायत में इस पहलू पर अलग से जांच करने की मांग की है। कारोबारी का कहना है, कि जांच होगी तो रिपोर्ट में वित्तीय लेन-देन, बैंक ट्रांजेक्शन और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेजों की भी जानकारी सामने आएगी।
इसी बीच कुछ तस्वीरों को लेकर भी चर्चा है, जिनमें कथित तौर पर प्रदेश के गृह मंत्री एक कमरे में बैठे हैं और बैठक के दौरान डीएसपी मोबाइल फोन का उपयोग करती दिखाई दे रही हैं। इन तस्वीरों को लेकर प्रोटोकॉल उल्लंघन के सवाल उठे हैं हालांकि प्रशासन की ओर से इनकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।लेकिन ये फोटो Cbn36 के पास सुरक्षित है ।एक डीएसपी पर कार्रवाई करने में इतना समय लग गया जिस पर आमजन को तरह तरह की बाते करने का मौका मिला ये सबसे बड़ा सवाल है आख़िर कौन बचाना चाह रहा है किसका नाम उछल रहा है ये अलग बात है पीड़ित अपने को बचाने में किसी के भी नाम का इस्तेमाल कर सकती है।ये जाँच का विषय हो सकता है लेकिन इस मामले में एक और बात चर्चा में है कि आख़िर वो कौन है जिसका बैक ग्राउंड कांग्रेस का है और वो क्यो इतना सक्रिय है उसे ब्लैक मेलर के नाम से जाना जाता है और आज़ वो क्यो अपने आप को पत्रकारिता के क्षेत्र में एक पत्रकार रूप में स्थापित करना चाहता है इस पर भी जाँच होनी चाहिए ।इस पूरे मामले में जिस तरह से पुलिस विभाग की किरकिरी हुई है वो भी कम चौकाने वाली नहीं है।इस पर ध्यान देने वाली बात है।जाँच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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