बिलासपुर। राज्य की अरपा के अलावा तीन नदियों के संरक्षण के लिए उनके उद्गम स्थल को संवारने जिला कमेटी की घोषणा की गई है। सुनवाई में अरपा नदी के उद्गम स्थल हेतु भूमि अधिग्रहण को लेकर शासन से स्टेटस रिपोर्ट मंगाई है।अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की गई है।
पूर्व राज्य से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्थल आखिर क्यों सूख रहे हैं, यह जानने और इन स्थलों को तलाशने के लिए राज्य सरकार ने कमेटी बनाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही यह तय किया कि प्रदेश की 10 नदियों के संरक्षण और संर्वधन पर यह कमेटी काम करेगी। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसके आदेश दिए थे। इसके साथ ही सभी नदियों और उनके उद्गम स्थल को राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने का भी आदेश दिया गया। रिकार्ड में यह नदियां और उनके उद्गम स्थल फिलहाल नाले के रूप में दर्ज हैं। शासन द्वारा सोमवार को पेश जवाब में कहा गया कि, 7 नदियों अरपा, महानदी, हसदेव, तांदूला, पैरी, केलो, मांड के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कोरबा की लीलागर, पेण्ड्रा की सोनभद्र और तिपान नदी को भी संरक्षित करने निर्देशित किया था। आज बुधवार को चीफ जस्टिस
रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई में शासन की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के निर्देश के परिपालन में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की सोन नदी एवं तिपान नदी के उद्गम स्थलों की पहचान कर नदियों के स्त्रोतों का पुनरूद्धार व पुनर्जीवित करने हेतु उपसमिति का गठन किया गया है।
जल संसाधन सचिव ने शपथपत्र पेश किया है। इसमें बताया गया कि, कोरबा जलि में लीलागर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जलि में सोन और टिपन नदियों के उद्गम और रिवाइवल के संबंध में, संबंधित कलेक्टरों को कमेटियां या सब-कमेटियां बनाने का निर्देश दिया गया है और नदियों के उद्गम की पहचान और रिवाइवल के लिए सभी ईमानदारी से कोशिशें की जा रही हैं। कोरबा और गौरेला-पेंड्रा मरवाही के संबंधित कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में रेवेन्यू, पंचायत, फॉरेस्ट, माइनिंग, वॉटर रिसोर्स और म्युनिसिपल काउंसिल डिपार्टमेंट के अधिकारियों की सब-कमेटी बनाई है।
प्रधान संपादक

