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November 1, 2026 6:22 pm

बालाघाट में लोकप्रियता की नई मिसाल छोड़ गए IPS आदित्य मिश्रा, अब देवास की संभालेंगे कानून-व्यवस्था की कमान

“मैं खाकी हूं’ कविता से लेकर नक्सल मोर्चे और जनहित के अभियानों तक रही अलग पहचान, देवास में एसपी के रूप में नई पारी की शुरुआत,एक जिले में छोड़ी लोकप्रियता की छाप, अब दूसरे जिले में विश्वास और सुरक्षा की नई कसौटी”

CBN36 देवास/बालाघाट। कुछ अधिकारी अपनी पदस्थापना से पहचाने जाते हैं, तो कुछ अपनी कार्यशैली और जनता के बीच बनाई गई छवि से। मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी आदित्य मिश्रा का नाम भी ऐसे ही अधिकारियों में शामिल हो गया है। बालाघाट में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने के बाद अब उन्होंने देवास जिले के पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल ली है।

बालाघाट में उनके कार्यकाल को लेकर जिस तरह लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, उससे उनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके स्थानांतरण के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भावुक संदेशों के साथ उनके कार्यकाल को याद किया। किसी ने उनकी पुलिसिंग की सराहना की तो किसी ने उन्हें जनता से जुड़कर काम करने वाला अधिकारी बताया।

नक्सल मोर्चे से जनजागरूकता तक रही पहचान

आदित्य मिश्रा 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। बालाघाट जैसे संवेदनशील जिले में उनकी जिम्मेदारी केवल सामान्य कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं थी। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पुलिस की चुनौतियां, अपराध नियंत्रण और आम नागरिकों के बीच विश्वास कायम करना उनके कार्यकाल के महत्वपूर्ण पहलू रहे।

बालाघाट के चर्चित डबल मनी मामले में पुलिस कार्रवाई और यातायात जागरूकता के लिए चलाए गए ‘नो हेलमेट-नो ड्राइव’ अभियान ने भी उनका ध्यान आकर्षित किया।

उनकी कविता ‘मैं खाकी हूं’ ने पुलिस की वर्दी के पीछे छिपे मानवीय भाव, कर्तव्य और संवेदनशीलता को सामने रखा। यही वजह रही कि उनकी पहचान केवल एक पुलिस अधिकारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बनी।

अब देवास में नई जिम्मेदारी, जनता की उम्मीदें भी बड़ी,क्या कहा आईपीएस आदित्य मिश्रा ने सुने

बालाघाट के बाद देवास में एसपी के रूप में उनकी नई पारी शुरू हो चुकी है। देवास में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना, अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और आम नागरिकों की शिकायतों का संवेदनशीलता से निराकरण उनके सामने अहम जिम्मेदारियां रहेंगी।

बालाघाट में बनी पहचान अब देवास में किस रूप में आगे बढ़ती है, यह आने वाला समय बताएगा। नए जिले में हर अधिकारी के सामने परिस्थितियां अलग होती हैं और चुनौतियां भी नई होती हैं।

बालाघाट की यादें, देवास की नई उम्मीदें

आदित्य मिश्रा का बालाघाट से देवास जाना महज एक प्रशासनिक स्थानांतरण नहीं, बल्कि एक जिले में बनाई गई पहचान के साथ दूसरे जिले में नई जिम्मेदारी संभालने का अवसर भी है।

बालाघाट के लोगों की प्रतिक्रियाएं उनके पिछले कार्यकाल की चर्चा को जीवंत रखे हुए हैं। अब देवास की जनता की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नए पुलिस कप्तान की कार्यशैली जिले की पुलिसिंग और आम नागरिकों के अनुभव में क्या बदलाव लाती है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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