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October 4, 2026 4:50 pm

बाजी राउत के बलिदान से लेकर गांधी के विचारों तक, युवाओं को राष्ट्र-निर्माण का संदेश

हिंदी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का समापन, ‘गांधी, धर्म और उत्तर आधुनिकता’ पर विशेष व्याख्यान

CBN36 वर्धा । महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को राष्ट्र-निर्माण, युवा प्रेरणा और मानवीय मूल्यों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। कस्तूरबा सभागार में ‘शहीद बाजी राउत की विरासत पर राष्ट्रीय युवा सम्मेलन : राष्ट्र-निर्माण हेतु युवा अभिप्रेरण’ का समापन हुआ। वहीं गालिब सभागार में ‘गांधी, धर्म और उत्तर आधुनिकता’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। दोनों कार्यक्रमों में युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने तथा मानवीय मूल्यों को जीवन में उतारने पर जोर दिया गया।

बारह वर्षीय बाजी राउत का समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा : कुलपति

राष्ट्रीय युवा सम्मेलन के समापन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि अनेक स्वतंत्रता सेनानी इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हो सके, लेकिन लोककथाओं, लोककाव्य, लोकवार्ताओं और साहित्य में आज भी जीवित हैं। विद्यार्थियों को हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य और प्रांतीय इतिहास का अध्ययन करना चाहिए, ताकि ऐसे गुमनाम नायकों को राष्ट्रीय मंच मिल सके।

उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा मिले तो कोई शक्ति भारत को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। ओड़िया कवि सच्चिदानंद राउत राय की कविता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बाजी राउत पर लिखी कविता उनकी कीर्ति का आधार बनी। “बारह साल के बच्चे का अपने देश के प्रति समर्पण इस तरह से हो सकता है, तो हमारी क्यों नहीं हो सकती,” उन्होंने कहा।

कुलसचिव डॉ. सुरेंद्र पी. गादेवार ने कहा कि सम्मेलन कुलपति के मार्गदर्शन और आयोजन टीम के समन्वित प्रयास से सफल हुआ। दूरशिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. शंभु जोशी ने कहा कि बाजी राउत ने लोभ के बजाय देश के सम्मान को चुना। पूर्ण स्वराज की यात्रा आज भी जारी है और इसमें युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

गुमनाम नायकों को खोजकर सामने लाए विद्यार्थी

नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर पाण्डेय ने सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उद्घाटन कार्यक्रम में 150 से अधिक और कार्यशाला में 50 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने निबंधों में वैष्णव चरण पटनायक, सारंगधर दास, कल्याणी दास, माधवगिरी और शुकदेव प्रसाद सिंह सहित कई गुमनाम नायकों को सामने लाया।

इस दौरान सम्मेलन पर केंद्रित स्मृति पत्र ‘शौर्य-स्मृति’ का लोकार्पण किया गया। निबंध प्रतियोगिता में मो. सोहैल अली प्रथम, अभिषेक कुमार पाठक द्वितीय और खुशी लोधी तृतीय रहीं। भाषण प्रतियोगिता में कृष्ण मुरारी प्रथम, दिगंत दिग्विजय स्वाँई द्वितीय और अभिषेक कुमार ओझा तृतीय रहे। विजेताओं को पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

धर्म के नैतिक पक्ष से गांधी को समझने की जरूरत

गांधी जयंती पर आयोजित विशेष व्याख्यान में पूर्व आईएएस अधिकारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गांधी को समझने के लिए धर्म के नैतिक पक्ष और उसके व्यापक मानवीय सरोकारों को समझना जरूरी है। उन्होंने गांधी, धर्म और उत्तर आधुनिकता के संबंध को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए कहा कि आधुनिकता तर्क, विकास और सार्वभौमिक सत्य पर जोर देती है, जबकि उत्तर आधुनिक चिंतन इन दावों की समीक्षा करता है।

उन्होंने कहा कि आज सूचना और संचार के साधन पहले से कहीं अधिक हैं, लेकिन सार्थक संवाद कम होता जा रहा है। ऐसे समय में गांधी के विचार समाज को नई दिशा दे सकते हैं।

कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि गांधी के लिए शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं थी। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को संवेदनशील, जिम्मेदार और स्वतंत्र चिंतन के योग्य बनाना था। विश्वविद्यालय की शिक्षा का उद्देश्य भी विद्यार्थियों में इसी मानवीय चेतना को विकसित करना है।

‘वैश्विक गांधी’ पुस्तक का लोकार्पण

कार्यक्रम में संपादक डॉ. मुन्नालाल गुप्ता, डॉ. राजीव रंजन राय और सह-संपादक अर्चना बलबीर की पुस्तक ‘वैश्विक गांधी : भारतवंशी चित्त के शिल्पी’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण तथा कुलगीत से हुई।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। युवा सम्मेलन के आयोजन में डॉ. हरीश पाण्डेय, डॉ. देवेन्द्र कुमार और दत्तुराम देउने सहित विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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