
जगदलपुर और दंतेवाड़ा में 3,799 हितग्राहियों को मिलेंगे कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण, आईईडी पीड़ितों पर विशेष फोकस
CBN36 रायपुर, 3 अक्टूबर। बस्तर संभाग में दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के मुताबिक कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्वास अभियान शुरू किया जा रहा है। जगदलपुर और दंतेवाड़ा में आयोजित होने वाले इन शिविरों में संभाग के 3,799 चयनित हितग्राहियों को लाभ दिया जाएगा। इनमें नक्सल हिंसा और आईईडी विस्फोटों में अंग गंवा चुके नागरिकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिविरों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन योजना के लाभ से वंचित नहीं होना चाहिए। ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से हितग्राहियों की अंतिम सूची तैयार करने के साथ आईईडी विस्फोट से प्रभावित दिव्यांगजनों का अलग से विवरण रखने को कहा गया है।
जगदलपुर में 5 से 7 अक्टूबर तक शिविर
कमिश्नर डोमन सिंह ने बताया कि जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर में 5 से 7 अक्टूबर तक तीन दिवसीय शिविर लगाया जाएगा। 5 अक्टूबर को बस्तर, 6 अक्टूबर को नारायणपुर और कोंडागांव तथा 7 अक्टूबर को कांकेर जिले के चयनित हितग्राही शिविर में पहुंचेंगे। यहां कुल 2,953 हितग्राहियों को लाभ दिया जाएगा।
इसके बाद 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन परिसर में शिविर लगेगा। इसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के 846 हितग्राहियों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और अन्य सहायक उपकरण दिए जाएंगे। दोनों शिविर प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शुरू होंगे।
मौके पर ही बनेंगे दिव्यांगता प्रमाण पत्र
शिविर में कृत्रिम अंग, ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कैलिपर्स और श्रवण यंत्र सहित जरूरत के अनुसार अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। जिन हितग्राहियों के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग की ओर से मौके पर ही प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जयपुर से आने वाली विशेषज्ञ तकनीकी टीम नए उपकरण उपलब्ध कराने के साथ पुराने कृत्रिम अंगों की मरम्मत भी करेगी। शिविर स्थल पर छाया, पेयजल, शौचालय, बिजली, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा की व्यवस्था रहेगी।
हितग्राहियों के लिए मुफ्त परिवहन और भोजन
दूर-दराज के इलाकों से आने वाले दिव्यांगजनों के लिए जिला प्रशासन की ओर से निःशुल्क परिवहन और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। सहायता के लिए स्काउट-गाइड के स्वयंसेवकों की तैनाती भी होगी। हितग्राहियों को पहचान के लिए आधार कार्ड की प्रति अथवा अन्य पहचान पत्र और दो पासपोर्ट आकार के फोटो साथ लाने होंगे।
‘आईईडी-मुक्त ग्राम’ की दिशा में भी काम
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि आईईडी विस्फोटों में अंग गंवा चुके नागरिकों के पुनर्वास के लिए अभियान को मिशन के रूप में चलाया जा रहा है। उन्होंने भविष्य की कार्ययोजना के तहत ग्राम सभाओं के माध्यम से गांवों में सुरक्षा सत्यापन कर उन्हें ‘आईईडी-मुक्त ग्राम’ घोषित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए।
उन्होंने शिविरों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेस वार्ता, सोशल मीडिया और स्थानीय इन्फ्लुएंसर्स का सहयोग लेने को भी कहा, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंदों तक इसकी जानकारी पहुंच सके।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कमिश्नर डोमन सिंह ने शिविरों की प्रशासनिक कार्ययोजना प्रस्तुत की। कलेक्टर आकाश छिकारा ने धरमपुरा में आयोजित होने वाले शिविर की तैयारियों की जानकारी दी। बैठक में आईजी, संभाग के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ और स्वास्थ्य व नगरीय निकायों के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टोरेट के एनआईसी कक्ष में पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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