
“हिंदी का पोषण करना हम सबकी जिम्मेदारी : आनंद निर्बाण -वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में डॉ. आंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत, एससी-ओबीसी विद्यार्थियों को मिलेगी निःशुल्क कोचिंग”
CBN36 वर्धा, 16 सितंबर। हिंदी को सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि समाज और संस्कृतियों को जोड़ने वाली जीवंत कड़ी बताते हुए वरिष्ठ संपादक आनंद निर्बाण ने कहा कि “हिंदी मां जैसी है, जो हर रिश्ते को जोड़कर रखती है। हिंदी का पोषण करना हम सबकी जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि हिंदी की ताकत उसकी समावेशी प्रकृति में है। देश की अलग-अलग भारतीय भाषाओं के शब्दों को आत्मसात कर हिंदी लगातार सहज, व्यापक और अधिक संप्रेषणीय बनती गई है।
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस एवं पोषण माह के तहत आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में आनंद निर्बाण ने हिंदी के विकास में महाराष्ट्र और विशेष रूप से नागपुर के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन ने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनंत गोपाल शेवड़े सहित अनेक मराठी भाषियों ने हिंदी के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किया।
नई पीढ़ी भाषा को दे नया विस्तार : कुलपति

ग़ालिब सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि कोई भी भाषा अपनी संस्कृति और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से जीवित रहती है। हिंदी में भारतीय संस्कृति के साथ विनम्रता और संवेदनशीलता का भाव समाहित है। नई पीढ़ी को हिंदी की मूल प्रकृति और संवेदनशीलता को बनाए रखते हुए उसे समय और जरूरत के अनुरूप आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता ने हिंदी को व्यापक समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘सरस्वती’ पत्रिका हिंदी की पाठशाला रही है। आज मीडिया और तकनीक के विस्तार के साथ हिंदी तथा भारतीय भाषाओं में रोजगार के नए अवसर भी सामने आए हैं।
प्रतिभाओं को मिला सम्मान
हिंदी माह के दौरान आयोजित टंकण, निबंध, रंगोली और पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। टंकण प्रतियोगिता में अश्विनी राठोड़ प्रथम, राधा ठाकरे द्वितीय तथा अमोल आड़े और वैशाली कदम तृतीय रहे।
निबंध प्रतियोगिता की विद्यार्थी श्रेणी में मो. सोहैल अली, मीनाक्षी पटले और वेद प्रकाश कुमार ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। कर्मचारी श्रेणी में आयुषा वानखेडे, रविंद्र वानखडे और धनंजय भट्टाचार्य विजेता रहे।
रंगोली प्रतियोगिता में कर्मचारी श्रेणी से प्रगति मिरगे प्रथम और डॉ. अंजना किशनपुरी द्वितीय रहीं। विद्यार्थी वर्ग में प्रिया माली, शिवानी लाटे और अनन्या अभिलिप्सा दास ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान हासिल किया। पोस्टर निर्माण में होंग हुओंग क्वीन्ह प्रथम, अनन्या अभिलिप्सा दास द्वितीय और बिशमा देवी तृतीय रहीं।
अब प्रशासनिक सेवा की तैयारी का रास्ता होगा आसान
वहीं विश्वविद्यालय में डॉ. आंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन, नई दिल्ली के सहयोग से संचालित होने वाले इस केंद्र के लिए 14 सितंबर को नई दिल्ली में एमओयू हुआ।
केंद्र के माध्यम से अनुसूचित जाति, ओबीसी और पीएम केयर्स योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जाएगी। केंद्र में कुल 100 सीटें होंगी। इनमें 70 प्रतिशत सीटें एससी और 30 प्रतिशत ओबीसी विद्यार्थियों के लिए निर्धारित हैं। एससी वर्ग की छात्राओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का प्रावधान किया गया है।
चयनित विद्यार्थियों को हर महीने चार हजार रुपये स्टाइपेंड मिलेगा। प्रत्येक विद्यार्थी पर लगभग 75 हजार रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है। तीन वर्ष के लिए मान्य इस व्यवस्था से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग दोनों मिल सकेंगे।
मंच से निकला संदेश-भाषा भी, अवसर भी
कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के गीत एवं नाटक प्रभाग के कलाकारों ने पोषण के महत्व पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान, हिंदी अधिकारी राजेश यादव, केंद्रीय संचार ब्यूरो नागपुर के सहायक प्रचार अधिकारी शुभम गुड़धे सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। संचालन जनसंपर्क अधिकारी बी.एस. मिरगे ने किया।
एक ओर हिंदी को समृद्ध और जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प, तो दूसरी ओर वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचने का अवसर-वर्धा का हिंदी विश्वविद्यालय भाषा, शिक्षा और सामाजिक अवसरों को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाता नजर आया।
प्रधान संपादक




