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August 14, 2026 4:34 pm

एक करोड़ की रिश्वत का आरोप: ट्रेनी आईपीएस पर सीबीआई कोर्ट पहुंचा मामला, वायरल ऑडियो के बाद एएसआई -कांस्टेबल सस्पेंड

जांच के बाद FIR भी संभव,आईजी का पलटवार- आरोप हैं, सबूत कहां हैं? सीबीआई ने नहीं दर्ज की FIR तो कोर्ट में परिवाद

“अब इस पूरे मामले में दो सवाल सबसे अहम हैं,क्या एक करोड़ रुपये के कथित लेन-देन के ठोस सबूत सामने आते हैं और क्या वायरल ऑडियो की जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं? इन दोनों सवालों का जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा”

CBN36 सरगुजा। अंबिकापुर के बहुचर्चित साइबर ठगी मामले में अब रिश्वत के आरोपों ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। ट्रेनी आईपीएस और तत्कालीन अंबिकापुर CSP राहुल बंसल पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए CBI स्पेशल कोर्ट, दिल्ली में परिवाद दायर किया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि रकम हवाला के जरिए दो किश्तों में पहुंचाई गई।

मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब रिश्वत की रकम मांगने से जुड़ा कथित ऑडियो सामने आया। इसके बाद अंबिकापुर साइबर सेल के एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। हालांकि, सरगुजा IG दीपक कुमार झा ने स्पष्ट किया है कि सीएसपी राहुल बंसल के खिलाफ एक करोड़ रुपये के लेन-देन का कोई ठोस सबूत अब तक सामने नहीं आया है।

20 लाख की ठगी से शुरू हुई जांच, 23 आरोपी पहुंचे जेल

पूरा मामला अंबिकापुर के क्रशर संचालक रवि मोहन गोस्वामी की शिकायत से शुरू हुआ। आरोप था कि शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर Money Trade 365 और Sky Trade एप्लीकेशन डाउनलोड कराकर उनसे 20 लाख 15 हजार रुपये की ठगी की गई।

शिकायतकर्ता के मुताबिक रकम 17-18 अलग-अलग बैंक खातों में 84 किश्तों के जरिए जमा की गई थी। पुलिस ने मामले में BNS की धारा 318(4), 3(5) और IT एक्ट की धारा 66 के तहत अपराध दर्ज किया।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने देश के अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई करते हुए 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसी जांच के दौरान अब रिश्वत के आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

आरोप: चालान में राहत के बदले मांगे एक करोड़

सीबीआई कोर्ट में दाखिल परिवाद के मुताबिक शिकायतकर्ता आकाश कुमार का आरोप है कि साइबर ठगी के मामले में जल्द चालान पेश करने और जांच में राहत देने के बदले एक करोड़ रुपये की मांग की गई।

परिवाद में दावा किया गया है कि रकम हवाला ऑपरेटरों के जरिए दो किश्तों में 50-50 लाख रुपये पहुंचाई गई। शिकायतकर्ता ने एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा पर कथित तौर पर रकम के लेन-देन में बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।

मोबाइल दुकान पर पैसे छोड़ने का कथित ऑडियो

मामले में सामने आए कथित ऑडियो ने पुलिस विभाग में खलबली मचा दी है। आरोप है कि आरक्षक अंशुल शर्मा ने अपना गैजेट खराब होने की बात कहते हुए रुपये की मांग की और अंबिकापुर की एक मोबाइल दुकान पर रकम छोड़ने के लिए कहा।

ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने ASI प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को निलंबित कर दिया। अब विभागीय जांच में ऑडियो की सत्यता और बातचीत की परिस्थितियों की भी जांच की जाएगी।

सीबीआई ने नहीं दर्ज की FIR तो कोर्ट में परिवाद

शिकायतकर्ता ने पहले CBI से मामले की शिकायत की थी। FIR दर्ज नहीं होने के बाद दिल्ली की CBI स्पेशल कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया। शिकायत के साथ शपथ-पत्र, व्हाट्सऐप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग भी पेश किए जाने का दावा किया गया है।

परिवाद में ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल, एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 7A तथा BNS की धारा 308 और 351 के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है। मामले में छत्तीसगढ़ के डीजीपी को भी नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है।

आईजी का पलटवार- आरोप हैं, सबूत कहां हैं?

सरगुजा IG दीपक कुमार झा ने कहा कि साइबर ठगी के मामले की जांच सीएसपी राहुल बंसल के नेतृत्व में की जा रही थी। आरोपी पक्ष की ओर से सीबीआई में शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने अपना जवाब प्रस्तुत किया है।

आईजी के अनुसार, शिकायतकर्ता से एक करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य पेश करने को कहा गया था, लेकिन अब तक कोई ऐसा सबूत पेश नहीं किया गया है, जिससे CSP के खिलाफ आरोप की पुष्टि हो सके।

जांच के बाद FIR भी संभव

आईजी ने कहा कि एएसआई और कांस्टेबल के बीच रुपये की मांग को लेकर बातचीत का कथित ऑडियो सामने आने के बाद दोनों को निलंबित किया गया है। मामले की जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर FIR भी दर्ज की जाएगी।

अब इस पूरे मामले में दो सवाल सबसे अहम हैं,क्या एक करोड़ रुपये के कथित लेन-देन के ठोस सबूत सामने आते हैं और क्या वायरल ऑडियो की जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं? इन दोनों सवालों का जवाब जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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