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August 13, 2026 8:06 pm

महिला आयोग की तबादले की सिफारिश हाई कोर्ट ने की खारिज

CBN36 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य महिला आयोग की ओर से की गई तबादले की सिफारिश को अधिकार क्षेत्र से बाहर मानते हुए निरस्त कर दिया है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि महिला आयोग के पास किसी कर्मचारी की सेवा शर्तों को प्रभावित करने वाला तबादला आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है।

मामला रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक के पड़ीगांव स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा है। याचिकाकर्ता डिग्री लाल पटेल (डीएल पटेल) विद्यालय में व्याख्याता सह प्रभारी प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। उनके प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत व्याख्याता एलबी सौदामिनी गुप्ता (43) ने उनके खिलाफ राज्य महिला आयोग में शिकायत की थी।

छुट्टी, वेतन और दुर्व्यवहार समेत लगाए थे आरोप

शिकायत में छुट्टी नहीं देने, वेतन रोके जाने, तलाक के बाद सरकारी अभिलेखों में नाम नहीं बदले जाने, दुर्व्यवहार और पुलिस द्वारा शिकायत पर कार्रवाई नहीं किए जाने जैसे आरोप लगाए गए थे। शिकायत पर सुनवाई करते हुए महिला आयोग ने प्रभारी प्राचार्य के तबादले की सिफारिश की थी।

इसके खिलाफ प्रभारी प्राचार्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना था कि शिकायत में उठाए गए कई मुद्दे पहले ही संबंधित सक्षम अधिकारियों और न्यायिक मंचों के समक्ष उठाए जा चुके हैं।

विभागीय स्तर पर कार्रवाई का दिया हवाला

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि छुट्टी, नाम परिवर्तन, कथित कदाचार और विभागीय शिकायतों से जुड़े मामलों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई हो चुकी है या मामले सक्षम मंचों के समक्ष लंबित हैं। एक मामले से संबंधित अवमानना याचिका भी हाई कोर्ट में लंबित होने की जानकारी दी गई।

वेतन रोकने के आरोप को भी याचिकाकर्ता ने गलत बताया। उन्होंने कहा कि संबंधित वेतन सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहले ही प्रोसेस कर भुगतान किया जा चुका है।

सरकार ने भी माना, आयोग ने अधिकार क्षेत्र का किया अतिक्रमण

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता ने कहा कि आयोग के आदेश को देखने से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि महिला आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्य महिला आयोग महिलाओं की शिकायतें प्राप्त कर सकता है और उचित उपचारात्मक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठा सकता है। हालांकि, आयोग को पक्षकारों के अधिकारों का न्याय निर्णयन करने का अधिकार नहीं है।

हाई कोर्ट ने कहा कि सीमित वैधानिक शक्तियों वाला आयोग तथ्यों की जांच कर संबंधित सरकार या प्राधिकारी से कार्रवाई का अनुरोध कर सकता है, लेकिन अपने अधिकार क्षेत्र का विस्तार करते हुए बाध्यकारी सेवा संबंधी आदेश जारी नहीं कर सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने महिला आयोग की तबादले की सिफारिश को निरस्त कर दिया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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