‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में शिक्षा, एआई, रोजगार और भविष्य की तकनीकों पर हुई चर्चा
CBN 36 बिलासपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में नई तकनीकों को अपनाने वाले युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अपार अवसर हैं। युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित न रहकर कौशल विकास, डिजिटल दक्षता और नवाचार पर ध्यान देना होगा।उक्त बाते सीवी रमन विश्वविद्यालय के सचिव, शिक्षाविद् एवं एआई विशेषज्ञ डॉ. अरविंद तिवारी ने बिलासपुर प्रेस क्लब के संवाद कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में कही।
आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ और युवा पत्रकारों ने शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोजगार, स्वरोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास, मीडिया और बदलते वैश्विक परिदृश्य से जुड़े विषयों पर डॉ. तिवारी से विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा एवं पदाधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ. तिवारी ने कहा कि आने वाले समय में लगभग हर क्षेत्र में एआई का प्रभाव दिखाई देगा। ऐसे में युवाओं के लिए नई तकनीकों को सीखना, स्वयं को लगातार अपडेट रखना और नवाचार की सोच विकसित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई मानव का प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी है। जो लोग तकनीक का बेहतर उपयोग करना सीखेंगे, उनके लिए रोजगार के साथ उद्यमिता और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
उन्होंने युवाओं से डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, कंटेंट क्रिएशन और अन्य आधुनिक तकनीकों में दक्षता हासिल करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि भविष्य उन्हीं का होगा, जो सीखने की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखेंगे और समय के अनुसार खुद को ढालेंगे।
शिक्षा व्यवस्था पर अपने विचार रखते हुए डॉ. तिवारी ने कहा कि अब रटने की बजाय समस्या समाधान, रचनात्मक सोच, नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान आधारित शिक्षा की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थी बदलते दौर की चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकेंगे।
मीडिया में एआई की भूमिका पर उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाचार संग्रह, डेटा विश्लेषण, भाषा अनुवाद, वीडियो संपादन और फैक्ट चेकिंग जैसे कार्यों को तेज और प्रभावी बना सकती है, लेकिन पत्रकारिता की मूल आत्मा-सत्य, निष्पक्षता, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण-का विकल्प कोई तकनीक नहीं हो सकती। अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी हमेशा पत्रकार की ही रहेगी।
स्टार्टअप और स्वरोजगार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने छोटे शहरों के युवाओं को भी वैश्विक स्तर पर काम करने का अवसर दिया है। ज्ञान और कौशल के आधार पर देश-विदेश की कंपनियों के साथ कार्य करना अब पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने शिक्षा नीति, रोजगार, तकनीकी बदलाव, सामाजिक प्रभाव, नैतिक चुनौतियों और एआई के भविष्य से जुड़े सवाल पूछे, जिनका डॉ. तिवारी ने विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, पारदर्शिता और समाज के विकास के लिए होना चाहिए।

कार्यक्रम में डॉ. अरविंद तिवारी को साल, श्रीफल और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। अध्यक्ष अजीत मिश्रा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, मीडिया प्रतिनिधि और आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे।
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