“एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि रायगढ़ पुलिस ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत फरार अपराधियों की लगातार गिरफ्तारी कर रही है तथा व्यापारियों और आम नागरिकों के विश्वास से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी”
CBN36 रायगढ़। रायगढ़ पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए ट्रांसपोर्ट कंपनी से करीब 32 लाख की धोखाधड़ी के मामले में चार महीने से फरार चल रहे आरोपी दीपक शर्मा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था, लेकिन कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर दरोगापारा से उसे दबोच लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार 24 मार्च 2026 को श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक के संचालक कमल किशोर शाह ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी में कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे। जांच के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर मिलने पर सितंबर 2025 से चल रहे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार कर भुगतान कराया। इसके लिए संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ और प्रियंका गुप्ता के बैंक खातों का उपयोग किया गया, जिससे कंपनी को लगभग 32 लाख की आर्थिक क्षति हुई। मामले में थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 187/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
विवेचना के दौरान बिल-वाउचरों में दर्ज वाहन नंबरों का सत्यापन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से कराया गया। जांच में कई वाहन नंबर दोपहिया और निजी वाहनों के निकले, जिनका माल परिवहन से कोई संबंध नहीं था। संबंधित वाहन मालिकों ने भी पुलिस को बताया कि उन्होंने कभी श्रीराम ट्रांसपोर्ट के लिए परिवहन कार्य नहीं किया।
एएसपी अनिल सोनी ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिलने पर 29 जुलाई को दरोगापारा से आरोपी दीपक शर्मा को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह कंपनी के ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करता था। धोखाधड़ी की राशि विभिन्न लोगों के खातों में भेजी जाती थी, जहां से कमीशन काटकर शेष रकम आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड और फोन-पे नंबरों पर ट्रांसफर की जाती थी।
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि करीब 32 लाख की धोखाधड़ी में से लगभग 16-17 लाख प्रकाश मिश्रा एवं दीपक प्रधान को दिए गए, जबकि उसे करीब 15 लाख मिले। उसने पुलिस को बताया कि प्राप्त राशि में से लगभग 4 लाख अपनी मां के इलाज पर तथा शेष रकम व्यक्तिगत खर्च और घूमने-फिरने में खर्च कर दी।
मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। फरार आरोपी की गिरफ्तारी में उप निरीक्षक ऐनु देवांगन, प्रशिक्षु उप निरीक्षक हर्ष चंद्राकर, एएसआई कोसो सिंह, आरक्षक कमलेश यादव एवं आरक्षक कोमल तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश और मामले की आगे की वैधानिक कार्रवाई में जुटी हुई है।
इस कार्रवाई पर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि रायगढ़ पुलिस ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत फरार अपराधियों की लगातार गिरफ्तारी कर रही है तथा व्यापारियों और आम नागरिकों के विश्वास से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
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