CBN36 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड की ग्राम पंचायत राजपुर में निर्मित सामुदायिक चेक डेम जल संरक्षण, रोजगार सृजन और कृषि समृद्धि का सफल उदाहरण बनकर सामने आया है। इस परियोजना से किसानों को वर्षभर सिंचाई की सुविधा मिलने लगी है, जिससे खेती अधिक लाभकारी हो गई है।
भागवत के खेत के समीप बनाए गए इस सामुदायिक चेक डेम के निर्माण के लिए 16.02 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। निर्माण कार्य पर कुल 15.69 लाख रुपए खर्च किए गए, जिसमें 2.79 लाख रुपए मजदूरी तथा 12.55 लाख रुपए सामग्री पर व्यय हुए। परियोजना के दौरान 1,671 मानवदिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे स्थानीय श्रमिकों को गांव में ही काम मिला और पलायन में कमी आई।
10 हजार घनमीटर से अधिक जल संरक्षण क्षमता

12 मीटर स्पैन वाले इस चेक डेम की जल संरक्षण क्षमता 10,080 घनमीटर है। इसके निर्माण से वर्षा जल का संरक्षण संभव हुआ है, जिससे आसपास के कुओं, हैंडपंपों और बोरवेल का जलस्तर बढ़ा है। गर्मियों में भी पानी की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर बनी हुई है।
10 हेक्टेयर भूमि को मिल रही सिंचाई
तकनीकी सहायक सुश्री पूजा पटेल के अनुसार चेक डेम का निर्माण सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया है। इससे लगभग 10 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकती है। यह संरचना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, सूखे की स्थिति में किसानों को राहत देने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में भी सहायक सिद्ध हो रही है।
किसानों की आय में बढ़ोतरी
इस परियोजना का लाभ श्री भगवाता सुखराम, श्री बुसाहु राम सिंह, श्रीमती चितरेखा पुनित, श्री ईष्वरी मधुर सिंह तथा श्री केवल पचरू सहित अनेक किसानों को मिल रहा है। पहले जहां खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, वहीं अब किसान खरीफ के साथ रबी एवं सब्जी फसलों की भी सफल खेती कर रहे हैं। पर्याप्त सिंचाई मिलने से उत्पादन बढ़ा है, खेती की लागत घटी है और किसानों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक के अनुसार चेक डेम बनने के बाद वर्षा जल गांव में ही संरक्षित हो रहा है, जिससे खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहती है और किसानों को समय पर सिंचाई मिल जाती है। किसानों का कहना है कि अब फसल खराब होने की चिंता काफी कम हो गई है और खेती पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बन गई है।
राजपुर का यह सामुदायिक चेक डेम जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, ग्रामीण रोजगार और कृषि समृद्धि का प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरा है। यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि वर्षा जल का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण कर जल संकट का स्थायी समाधान संभव है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।
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