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June 30, 2026 2:45 pm

हाई कोर्ट का सख्त निर्देश: नाबालिग भाई-बहन को आज दोपहर 2:15 बजे कोर्ट में किया जाए पेश, जिला मजिस्ट्रेट रहेंगे मौजूद

बिलासपुर,30 जून 26। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान दो नाबालिग भाई-बहन को मंगलवार दोपहर 2:15 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है। रमेश सिन्हा और रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आदेश दिया कि बच्चों को संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। यदि किसी अपरिहार्य कारण से जिला मजिस्ट्रेट उपस्थित नहीं हो पाते हैं तो उनकी जगह संबंधित एसडीएम बच्चों को लेकर न्यायालय में उपस्थित होंगे।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 12 वर्षीय बालिका और 9 वर्षीय बालक वर्तमान में अलग-अलग चाइल्ड केयर संस्थानों में सुरक्षित हैं। बालक बैकुंठपुर (कोरिया) स्थित चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में तथा बालिका अंबिकापुर के बालिका गृह में रह रही है।

इससे पहले दोनों बच्चों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, लेकिन संबंधित जिला मजिस्ट्रेट इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डिवीजन बेंच ने बच्चों की काउंसलिंग आवश्यक मानते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया।

सुरक्षा के विशेष निर्देश

हाई कोर्ट ने बच्चों की यात्रा और सुरक्षा को लेकर भी विस्तृत निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार यात्रा के दौरान संबंधित डिप्टी पुलिस अधीक्षक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। चाइल्ड केयर संस्थान के सक्षम अधिकारी भी बच्चों के साथ मौजूद रहेंगे। न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा मामला

मामले में बच्चों की सौतेली बहन ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसके नाबालिग भाई-बहन को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।

सुनवाई के दौरान मामले ने नया मोड़ ले लिया, जब एक बच्चे ने न्यायालय के समक्ष आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता (सौतेली बहन) के पति ने उसके साथ दुष्कर्म किया है तथा दोनों बच्चे वर्तमान में बाल गृह में सुरक्षित हैं।

इस पर याचिकाकर्ता महिला ने अदालत को बताया कि उसने स्वयं अपने पति के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामले की गंभीरता और बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने उनकी उचित काउंसलिंग के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। न्यायालय के आदेश की प्रति मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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