बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेवा-निवृत्ति से ठीक एक दिन पहले एक शिक्षिका को बड़ी राहत देते हुए प्रशासन को निर्देश दिया है कि उन्हें 30 जून 2026 को सुबह 11 बजे तक उनके पदोन्नत पद पर नए स्कूल में जॉइनिंग कराई जाए। न्यायालय ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए राज्य शासन के अधिवक्ता को सोमवार दोपहर 2:15 बजे तक संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को आदेश की सूचना देने के भी निर्देश दिए हैं।
यह आदेश हाई कोर्ट के जस्टिस बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने शिक्षिका मीना सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
याचिकाकर्ता मीना सिंह सरगुजा जिले के विकासखंड अंबिकापुर स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बंधियाचुआ में पदस्थ थीं। विभाग ने उनका पदोन्नति आदेश जारी कर पूर्व माध्यमिक शाला बंधा, विकासखंड लखनपुर में पदस्थापना की थी। उन्हें पुराने स्कूल से कार्यमुक्त कर दिया गया था, लेकिन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अंबिकापुर की ओर से तकनीकी रूप से रिलीव नहीं किए जाने के कारण वे नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं कर सकीं।
याचिका में कहा गया कि 30 जून 2026 को उनकी सेवानिवृत्ति निर्धारित है। यदि वे रिटायरमेंट से पहले पदोन्नत पद पर जॉइन नहीं कर पातीं, तो उन्हें पदोन्नति तथा उससे जुड़े पेंशन संबंधी लाभों से वंचित होना पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुराग सिंह ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल नए पद पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। वहीं, राज्य शासन की ओर से पैनल अधिवक्ता शाहिल सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता ने नए पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग का प्रयास नहीं किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्देश दिया कि मीना सिंह को 30 जून को सुबह 11 बजे तक पूर्व माध्यमिक शाला बंधा, विकासखंड लखनपुर में पदोन्नत पद पर जॉइनिंग दी जाए।
न्यायालय ने राज्य शासन के अधिवक्ता को यह भी निर्देशित किया कि वे सोमवार दोपहर 2:15 बजे तक संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी एवं स्कूल प्रशासन को आदेश की सूचना भेजकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित करते हुए याचिका को पुनः सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्यायालय के आदेश का पालन हुआ है।
हाई कोर्ट के इस त्वरित हस्तक्षेप से शिक्षिका को राहत मिली है और अब उनके पदोन्नत पद पर कार्यभार ग्रहण कर सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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