राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चिकित्सा एवं जनजातीय स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए किया सम्मानित
नई दिल्ली।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘पद्म पुरस्कार 2026’ समारोह में छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में जनजातीय स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले तथा श्रीमती सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से ‘पद्म श्री’ सम्मान से अलंकृत किया। चिकित्सा सेवा, कुपोषण उन्मूलन और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए चार दशकों से अधिक समय से किए जा रहे उनके समर्पित कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ. रामचंद्र गोडबोले एक आयुर्वेद चिकित्सक हैं, जिन्होंने प्रारंभिक 12 वर्षों तक महाराष्ट्र में सेवा देने के बाद पिछले लगभग 30 वर्षों से छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को जनजातीय समुदायों तक पहुंचाने का कार्य किया है। वहीं, समाजसेविका श्रीमती सुनीता गोडबोले ने आदिवासी महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा तथा कुपोषण उन्मूलन के लिए लगातार कार्य करते हुए बस्तर में जनसेवा को नया आयाम दिया।
प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में इन विभूतियों की उत्कृष्ट सेवा और समर्पण देश के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पद्म पुरस्कार विजेता समाज परिवर्तन के वास्तविक पथ-प्रदर्शक हैं, जिन्होंने सेवा भावना से ‘पीपुल्स पद्म’ की अवधारणा को साकार किया है।
राष्ट्रपति द्वारा इस वर्ष कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी प्रदान की गई थी, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कार सूची में 19 महिलाओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। इसके अतिरिक्त विदेशियों, अनिवासी भारतीयों तथा भारतीय मूल के व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया है, जबकि 16 पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किए गए।
मूलतः महाराष्ट्र निवासी डॉ. रामचंद्र गोडबोले तथा उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले ने वर्ष 1990 में विवाह के बाद बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र में जाकर जनजातीय समाज की सेवा का संकल्प लिया था। वनवासी कल्याण आश्रम के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में डॉ. गोडबोले ने अबूझमाड़ क्षेत्र के समीप एक छोटे क्लिनिक से अपनी सेवा यात्रा प्रारंभ की और दूरस्थ वनांचलों में गरीब आदिवासी मरीजों का निःशुल्क उपचार किया।
प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने 3,000 से अधिक गंभीर रूप से बीमार आदिवासियों का उपचार किया। इसके बाद जंगलों के भीतर 114 से अधिक विशाल चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 9,000 से अधिक ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई तथा 400 से अधिक गंभीर मरीजों को रायपुर के चैरिटेबल अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया गया।

श्रीमती सुनीता गोडबोले ने स्थानीय बोलियों ‘गोंडी’ और ‘हलबी’ सीखकर जनजातीय महिलाओं और बच्चों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया। उनके प्रयासों से बस्तर के तीन जिलों के 37 विद्यालयों के लगभग 2,000 बच्चे प्रतिवर्ष स्वास्थ्य और कुपोषण उन्मूलन जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में उनके व्यक्तिगत प्रयासों से 24 गांवों के 460 बच्चों को गंभीर कुपोषण से बाहर निकाला गया है।
इसके अतिरिक्त, गोडबोले दंपत्ति ने सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता, बाल अधिकार संरक्षण तथा आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वर्तमान में यह दंपत्ति बस्तर में जनजातीय बच्चों के स्वास्थ्य पर केंद्रित संगठन “बनफूल” का संचालन कर रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार और राज्य प्रशासन ने गोडबोले दंपत्ति को ‘पद्म श्री’ सम्मान मिलने को राज्य के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सम्मान बस्तर के जनजातीय समाज के संघर्ष, सेवा और स्वास्थ्य अधिकारों को मिली राष्ट्रीय मान्यता है।
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