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May 26, 2026 6:42 pm

एनडीपीएस कोर्ट का बड़ा फैसला: 20 किलो गांजा तस्करी केस में 3 आरोपी बरी, पुलिस जांच पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने अंतर्राज्यीय गांजा तस्करी के एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश किरण त्रिपाठी की अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।

अदालत ने अपने फैसले में पुलिस जांच की गंभीर खामियों को रेखांकित करते हुए कहा कि जांच एजेंसी न तो कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर सकी और न ही आरोपियों के खिलाफ विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत कर पाई। मामले में आरोपी अजय कुमार राठौर, कृष्ण कुमार यादव और रवि शंकर गुप्ता को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया।

मुखबिर सूचना के आधार पर हुई थी कार्रवाई

मामला 25 अक्टूबर 2023 का है। मरवाही थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर नाकाबंदी कर बिना नंबर की पल्सर बाइक को रोका था। पुलिस का दावा था कि बाइक से 20 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया। मौके से अजय राठौर और एक अपचारी बालक को पकड़ा गया था।

इसके बाद पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और आरोपियों के मेमोरेंडम बयान के आधार पर कथित गांजा तस्करी सिंडिकेट का खुलासा करने का दावा करते हुए कृष्ण कुमार यादव और रवि शंकर गुप्ता को भी आरोपी बनाया था।

अदालत में कमजोर पड़ गया पूरा केस

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की जांच और दस्तावेजों में कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं। अदालत ने विशेष रूप से चार प्रमुख कमियों को आधार बनाते हुए पुलिस की पूरी कहानी पर सवाल खड़े किए।

स्वतंत्र गवाहों ने नहीं दिया साथ

जब्ती और अन्य कार्रवाई में शामिल स्वतंत्र गवाह अदालत में अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। इससे बरामदगी की कार्रवाई की विश्वसनीयता कमजोर हो गई।

डिजिटल साक्ष्य कानूनी कसौटी पर फेल

पुलिस ने आरोपियों के बीच संपर्क साबित करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड पेश किया था, लेकिन भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे गंभीर प्रक्रियात्मक चूक माना।

एनडीपीएस एक्ट की धारा 42 के पालन पर सवाल

अदालत ने पाया कि तलाशी जब्ती और गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में विरोधाभास हैं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 42 के अनिवार्य प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया।

षड्यंत्र और कब्जे का ठोस प्रमाण नहीं

कोर्ट ने कहा कि सह-आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र या प्रतिबंधित पदार्थ पर सचेत आधिपत्य का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। केवल सह-आरोपी के मेमोरेंडम कथन के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।

कोर्ट बोली- संदेह के आधार पर नहीं हो सकती सजा

विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि फौजदारी मामलों में अभियोजन पक्ष का दायित्व होता है कि वह आरोपों को “युक्तियुक्त संदेह से परे” सिद्ध करे। केवल संदेह, अनुमान या कमजोर परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।इन्हीं आधारों पर अदालत ने तीनों आरोपियों को बरी करते हुए तत्काल रिहाई का आदेश जारी किया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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