वर्धा, 21 अप्रैल 2026। पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया वर्धा चैप्टर द्वारा राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर ‘जनसंपर्क : लोकतंत्र का पांचवां स्तंभ’ विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय जनसंचार संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र अमरावती के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राजेश कुशवाह ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए।
डॉ. कुशवाह ने कहा कि जनसंपर्क समानता और सहिष्णुता का आधार है तथा इसकी सबसे बड़ी शक्ति विश्वसनीयता है। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र में संवाद का विशेष महत्व है और जनसंपर्क भरोसा व सहमति निर्माण का प्रभावी माध्यम बनकर लोकतंत्र की गति को सशक्त करता है। वर्तमान समय में सूचनाओं के भ्रमजाल के बीच जनसंपर्क एक फिल्टर की भूमिका निभा रहा है और किसी भी सफल अभियान का प्रमुख संचालक बनता है।
जनसंपर्क के समक्ष चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह एक हिमखंड के समान है, जिसका अधिकांश भाग दिखाई नहीं देता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल युग में फेक न्यूज की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण जनसंपर्क कर्मियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने जोर दिया कि सफल पीआर प्रोफेशनल को तथ्यों का संरक्षण करते हुए उन्हें तार्किक ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए तथा सत्य का प्रहरी बनना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक कितनी ही उन्नत क्यों न हो जाए, वह मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकती।
भारतीय भाषाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए डॉ. कुशवाह ने कहा कि भाषाई समृद्धि ही देश की समृद्धि का आधार है, इसलिए क्षेत्रीय भाषाओं में जनसंपर्क को बढ़ावा देना आवश्यक है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना वर्धा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राजेश लेहकपुरे ने प्रस्तुत की। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती और राष्ट्र निर्माण में जनसंपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया तथा पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक के संदेश का उल्लेख किया।
स्वागत एवं वक्ता परिचय महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप वर्मा ने दिया। कार्यक्रम का संचालन सचिव बी.एस. मिरगे ने किया तथा महासचिव प्रफुल्ल दाते ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की शुरुआत जनसंपर्क गीत से हुई। इस अवसर पर प्रयागराज से डॉ. अख्तर आलम सहित वर्धा एवं अन्य स्थानों से अनेक शिक्षाविद् शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
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