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June 5, 2026 9:30 am

कानाफूसी

एनएसयूआई का आंदोलन बनाम दिग्गजों की परेशानी

बुधवार को छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में एनएसयूआई ने बड़ा पोलिटिकल शो किया। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में यूथ नेताओं ने जितना बन पड़ा उससे ज्यादा ही किया। बेरीकेड्स तोड़े, वाटर केनन की तेज धार के बीच डंटे रहे। कुछ युवकों ने पुलिस की लाठियां भी खाई और अस्पताल में भर्ती भी हुए।  ऐसा कह सकते हैं, राज्य की सत्ता हाथ से जाने के बाद कांग्रेस के फ्रंटल आर्गेनाइजेशन की यह बड़ा आंदोलन था, जो पूरी तरह सफल रहा। अब बात  करते हैं, यूथ नेताओं के आंदोलन से शहर के दिग्गज माने जाने वाले कांग्रेसी नेताओं को परेशानी क्यों हुई। आंदोलन में उपस्थिति तो दर्ज कराई, पर मन से नहीं, तन से मौजूदगी और मन से काफी दूर।  ऐसा भला क्यों हुआ। जरा सोचिए, बिलासपुर से दूर दूसरे शहर का नेता यहां आकर अपनी जमीन पुख्ता करते दिखाई दें तो परेशानी तो होनी ही है ना, अपनी जमीन खिसकने और पूछपरख कम होने से किसे परेशानी नहीं होगी। 

नेताजी का कुर्ता फटा, बात दिल्ली तक जा पहुंची

बात जब एनएसयूआई के आंदोलन की चल पड़ी है तब नेताजी की बात तो आगे बढ़ानी ही पड़ेगी। कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी और एआईसीसी के सचिव, विधायक महाशय आंदोलन में शिकरत करने भिलाई से पहुंचे थे। यूथ कांग्रेस के आंदोलन में लीडरशीप भी तकरीबन उनके हाथ में ही नजर आई। अगुवाई करते दिखाई दिए और लीडरशीप भी करते नजर आए,तभी तो कुर्ता भी फट गया। इधर नेताजी का कुर्ता फटा और उधर बात दिल्ली तक जा पहुंची। जरा एक बात पता करिए नेताजी का कुर्ता फटने से लेकर उनके लीडरशीप को लेकर मेजबान कांग्रेसियों के बीच कैसी काना-फूसी होते रही। वैसे भी शहर और जिले के संगठन में उनका दबदबा तो कायम ही है। नामों की घोषणा होने के तत्काल बाद गुट को लेकर चर्चा हुई और अब तो लोगों की जुबान पर भी है। भिलाई से बिलासपुर तक राजनीति एक पटरी पर चलते दिखाई दे रही है। ऐसे में मेजबानों का क्या होगा। राम जाने या फिर वे खुद ही जाने।

नगर निगम उप चुनाव और भाजपा की हार

बिलासपुर नगर निगम के एकमात्र वार्ड में उप चुनाव हुआ। गुरुवार को चुनाव परिणाम की घोषणा भी कर दी गई। वार्ड में कांग्रेस का पंजा चल गया, कांग्रेस के जीत का सिलसिला इस वार्ड में अनवरत जारी है। इस चुनाव परिणाम के साथ एक हैट्रिक भी बनी। हैट्रिक किसी और ने नहीं, भाजपा उम्मीदवार ने बनाई। लगातार तीसरी हार की हैट्रिक। जीत-हार के बीच जिस बात को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह भाजपा में गुटबाजी की।  भाजपा में तो ऐसा होता नहीं था, फिर ये रोग आखिर आया कहां से। निगम के राजनीति के जानकारी एक भाजपाई की मानें तो मौजूदा शहर सरकार में जो कुछ चल रहा है, या जैसा शहर सरकार को चलाया जा रहा है, उससे सत्ताधारी दल के पार्षद खफा हैं। नाराजगी का असर तो कहीं ना कहीं दिखाई देगा ना, सो वार्ड नंबर 29 में नजर आया। 

एल्डरमैन,गुटबाजी और मंत्रीजी

नगरीय निकायों में अब उप चुनाव की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। चुनाव परिणाम की घोषणा हो गई है। शहर की राजनीति से ताल्लुक रखने वाले कार्यकर्ता से लेकर नेताओं की नजरें अब नगरीय निकायों में सरकार की तरफ से बनाए जाने वाले एल्डरमैन की तरफ जा टिकी है। सत्ताधारी दल की ओर से ही सवाल उठाए जा रहे हैं, आखिर कब तक नियुक्ति होगी। दिग्गज भाजपाइयों की नजरें भी लगी हुई है, समर्थकों को शहर सरकार की राजनीति में एडजस्ट जो करना है। एक भाजपाई की मानें तो विभागीय मंत्री को इस बात का डर सता रहा है, एल्डरमैन की नियुक्ति के बाद कहीं गुटबाजी का तूफान ना खड़ा हो जाए। इसे डर कहें या फिर नियुक्ति की फाइल को पेंडिंग में डालने की सियासी चाल। बहरहाल अब कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूटने लगा है। गुस्सा फूटा तब क्या होगा। 

अटकलबाजी

एनएसयूआई के आंदोलन में नेताजी का कुर्ता फट गया। बात दिल्ली तक जा पहुंची, मेजबानों के बीच की चर्चा है, पीसीसी चेयरमैन बनने की जुगत भिड़ा रहे हैं नेताजी, जरा पता करिए, मेजबानों की बातों में कितना दम है।

वार्ड क्रमांक 29 में भाजपा उम्मीदवार की पराजय के बाद शहर सरकार की राजनीति में अब किस करवट बैठेगी। एमआईसी में जरुरी बदलाव हो गया फिर कुछ और?

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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