Explore

Search

July 21, 2026 8:04 am

सर्पदंश मुआवजा घोटाला: फर्जी पीएम रिपोर्ट मामले में सिम्स की महिला डॉक्टर गिरफ्तार, आधा दर्जन से अधिक चिकित्सक पुलिस के रडार पर

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (सिम्स) से जुड़े कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में सिम्स की तत्कालीन महिला चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। मामले में पुलिस की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और सिम्स के आधा दर्जन से अधिक चिकित्सक भी जांच के घेरे में बताए जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, डॉ. प्रियंका सोनी पर सामान्य या अन्य कारणों से हुई मौत को सर्पदंश से हुई मृत्यु दर्शाते हुए कथित रूप से फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है। आरोप है कि इन रिपोर्टों के आधार पर शासन से मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया, जिससे सरकारी खजाने को लाखों रुपये की क्षति पहुंची।

तीन बाबू पहले ही भेजे जा चुके हैं जेल

फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले में पुलिस पहले ही एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है। वहीं, सिविल लाइन थाना में दर्ज अन्य मामलों में भी डॉ. प्रियंका सोनी का नाम सामने आया है। पुलिस उन्हें रिमांड पर लेकर अलग से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

पांच वर्षों की रिपोर्टें जांच के दायरे में

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में सिम्स से सर्पदंश से संबंधित पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले आधा दर्जन से अधिक चिकित्सकों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन-किन मामलों में कथित रूप से फर्जी रिपोर्ट तैयार की गई।

शिकायत से खुला घोटाले का राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब तहसील कार्यालय के नायब नाजिर ने महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान सामने आया कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम डॉ. प्रियंका सोनी ने किया था। आरोप है कि हार्ट अटैक या सामान्य मृत्यु को सर्पदंश से हुई मौत बताया गया, जिससे मृतकों के परिजनों को सरकारी मुआवजा मिल सके।

पुलिस के अनुसार सक्रिय था संगठित गिरोह

जांच में पुलिस ने दावा किया है कि पूरे प्रकरण के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था। इस मामले में मृतक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी तथा अधिवक्ता रंजीत कुमार चतुर्वेदी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं, गिरोह का कथित मास्टरमाइंड अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार फरार है, जिसकी तलाश जारी है। अब तक जिले में ऐसे 15 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है।

मर्ग रजिस्टर पुलिस के कब्जे में

सिविल लाइन पुलिस ने सिम्स का मर्ग रजिस्टर अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2020 में 596, 2021 में 481, 2022 में 493, 2023 में 412, 2024 में 479 और 2025 में अब तक 471 मर्ग दर्ज किए गए हैं। विभिन्न थाना क्षेत्रों से सर्पदंश के कई मामलों की जांच की जा रही है।

एक अधिकारी की भूमिका भी जांच में

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सर्पदंश से जुड़े लगभग 80 प्रतिशत मामलों की विवेचना सिम्स के तत्कालीन चौकी प्रभारी गुलाब सोनवानी ने की थी। अब जांच एजेंसियां इन मामलों की भी समीक्षा कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट हो सके।हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

Advertisement Carousel
CRIME NEWS

BILASPUR NEWS