इस निर्णय की सराहना तो बनती है
समूचा छत्तीसगढ़ इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। सुबह से ही गर्म हवाएं चलने लगी है। गर्मी के थपेड़ों के बीच सिग्नल में रुकना पड़अ जाए तब तो कहने ही क्या। महज डेढ़ से दो मिनट का स्टॉपेज पहाड़ जैसे लगता है। परेशानी एकाएक बढ़ जाती है। अब आज से ऐसा नहीं होगा। लोगों की दिक्तों को देखते हुए एसएसपी ने ट्रैफिक डीएसपी को जरुरी निर्देश जारी कर दिया है। निर्देश में लोगों की दिक्कतें और जनसहभागिता की एक बानिगी झलक नजर आती है। कल से दोपहर 12 से शाम चार बजे तक ट्रैफिक सिग्नल स्टाॅप रहेगा। शाम चार बजे के बाद पीली और हरी लाइटें जगमगाने लगेंगी। मतलब साफ है, गर्मी के वक्त कामकाज के सिलसिले में घर से निकलने वालों को ग्रीन सिग्नल का इंतजार करना नहीं पड़ेगा। बिना रुके आप सिग्ल पार कर सकेंगे। इस निर्णय के लिए पुलिस की सराहना तो बनती है, खासकर जिले के कप्तान की जिन्होंने सहभागिता का नायाब उदाहरण पेश किया है।
निगम की सामान्य सभा और नकाबपोश पार्षद
नगर निगम की राजनीति करने वालों को कैसे मीडिया में लाइम लाइट पर बने रहना है, अच्छी तरह आता है। तभी तो सत्ताधारी दल का एक पार्षद महोदय बिना किसी कारण के सामान्य सभा की मीटिंग में मास्क लगाकर आ बैठे। जाहिर है मीडिया की नजरें पड़ी और सुर्खियां भी बटोरी। अंदरखाने की जो चर्चा है, उसमें उनको इस तरह की हरकत के लिए बंगले की फटकार भी सहनी पड़ी है। सामान्य सभा से पहले पार्षद महोदय एक डेयरी में बैठकर चाय की चुस्कियां ले रहे थे, अच्छे खास नजर आ रहे थे। एक घंटे ऐसा क्या हो गया,बीमार पड़ गए और मास्क लगाकर पहुंच गए। सस्ती सियासी लोकप्रियता ने ऐसा करने मजबूर कर दिया। मीडिया में सुर्खियां बटोरते ही फटकार भी सहनी पड़ गई सो अलग। पता नहीं, आने वाले समय में टिकट मिलती भी है या नहीं, मिल गई तो विकास भवन पहुंच पाएंगे या नहीं। चर्चा अभी से ही शुरू हो गई तो समझिए मामला वाकई गंभीर है। टेंशन के साथ अटेंशन भी।
मीटिंग भाजपा की और मुद्दा कांग्रेस और कांग्रेसी
बात शहर सरकार की सियासत की चल पड़ी है तो थोड़ा फ्लैश बैक पर भी बात हो ही जाए। सामान्य सभा की बैठक से ठीक पहले करबाल रोड भाजपा कार्यालय में पार्षदों की मीटिंग हुई। मेयर से लेकर सभापति और तमाम भाजपाई पार्षदों की मौजूदगी रही। मीटिंग की अगुवाई जिला व शहर जिला भाजपा के दोनों अध्यक्षों ने की। विधायकों को आना था, सो नहीं आ पाए। ये अपने-अपने कारण हो सकते हैं,इसमें खोजबीन फिलहाल नहीं करते। मीटिंग में सामान्य सभा की झलक दिखाई दे गई थी। जो लोग बैठे थे समय गए थे, आने वाले दिनों में लखीराम अग्रवाल स्टेडियम में कुछ ठीक नहीं घटेगा। भाजपाई मीटिंग में कांग्रेस-कांग्रेसी का जो आरोप-प्रत्यारोप लगा,इसके पहले कभी नहीं हुआ। नाराजगी को जाहिर करने या दिखाने का शालीन तरीका हुआ करता था। ये तो पहली बार हुआ जब तू भी कांग्रेसी मैं भी कांग्रेसी वाला नारा जिला भाजपा कार्यालय में गूंज उठा। इसकी झलक स्टेडियम में सामान्य सभा की मीटिंग के दौरान दिखाई भी दी, जब भाजपा के पार्षद ही विपक्षी का रोल प्ले करते नजर आए।
भाजपा के एक पदाधिकारी को क्यों गुस्सा आया
जिले की भाजपाई राजनीति में इन दिनों एक ही बात की चर्चा हो रही है, आखिर जिले के एक दिग्गज भाजपा नेता को सिस्टम पर गुस्सा क्यों आ गया। क्यों उनकी नाराजगी इतनी बढ़ी कि सिस्टम को ठीक करते-करते अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। बात चली है तो थोड़ा आगे लेकर चलते हैं, रेत माफिया इन दिनों कुछ ज्यादा ही सक्रिय हैं। बेलतरा से लेकर कोटा और कोटा से लेकर थोड़ा और आगे बेलगहना तक माफिया की धमक साफ सुनाई देती है। सुनाई भी दे रही है और दिखाई भी दे रही है। इसी बात को लेकर भाजपाई पदाधिकारी को गुस्सा आ गया , गुस्से में सिस्टम से लेकर कोटा,बेलतरा सभी उनके घेरे में आ गए। पता नहीं आगे क्या होगा।
अटकलबाजी
भाजपा की सामान्य सभा की तैयारी बैठक में पार्षद और मेयर के बीच जो कुछ हुआ, क्या उसकी पृष्ठभूमि पहले से तय हो गई थी। किस भाजपाई दिग्गज ने आग में घी डालने का काम किया, किसके कहने पर यह सब हुआ।
रेत माफियाओं की बढ़ती दखलंदाजी और दबंगाई के बीच दिग्गज भाजपा नेता को आखिर गुस्सा किस बात पर आया। उनके निशाने पर कौन-कौन एमएलए है, जिसे लेकर न्यायधानी से लेकर राजधानी तक चर्चा होने लगी है।
प्रधान संपादक


