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May 31, 2026 5:01 pm

मोर गांव, मोर तरिया: गांवों की प्यास बुझाने और भविष्य संवारने की पहल

“कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं,प्रशासनिक निगरानी के साथ-साथ ग्रामीणों की सहभागिता भी इस अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बन रही है”

छत्तीसगढ़ ,बिलासपुर।जल ही जीवन है, और ग्रामीण जीवन की धुरी भी। बदलते मौसम, घटते भू-जल स्तर और बढ़ती जल आवश्यकता के बीच बिलासपुर जिले में संचालित “मोर गांव, मोर तरिया” अभियान केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जल सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि की नई इबारत लिख रहा है। गांवों में बन रही नई तरियां न केवल वर्षा जल को सहेजने का माध्यम बन रही हैं, बल्कि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण भी लेकर आई हैं।

जल संरक्षण को मिल रही नई दिशा

शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों के तहत जिले में 38 नवीन तरिया निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों को मानसून पूर्व पूरा करने के लिए विशेष कार्ययोजना के तहत तेजी से अमल में लाया जा रहा है। जनपद पंचायत मस्तूरी की ग्राम पंचायत बोहारडीह में निर्माणाधीन नवीन तरिया इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहां श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी के साथ कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई जा रही ये तरियां आने वाले समय में जल संकट से निपटने की मजबूत व्यवस्था साबित होंगी। बरसात का पानी अब बहकर व्यर्थ नहीं जाएगा, बल्कि गांवों में ही संरक्षित होकर लोगों की जरूरतों को पूरा करेगा।

खेती, पशुपालन और पर्यावरण को मिलेगा लाभ

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार खेती और पशुपालन है, जिनकी सफलता जल उपलब्धता पर निर्भर करती है। नई तरियों के निर्माण से खेतों की सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल स्रोत उपलब्ध होंगे। पशुओं को भी वर्षभर पानी मिल सकेगा, जिससे पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार जल संरचनाओं के निर्माण से भू-जल स्तर में सुधार होता है। इससे कुएं, हैंडपंप और अन्य जल स्रोत लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं। इसके साथ ही गांवों का प्राकृतिक पर्यावरण भी संतुलित रहता है और हरियाली को बढ़ावा मिलता है।

रोजगार के साथ विकास का दोहरा लाभ

मोर गांव, मोर तरिया अभियान की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिल रहा है। निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इससे मजदूरों को अपने गांव में ही काम मिलने से पलायन की आवश्यकता कम हो रही है और उनकी आय में वृद्धि हो रही है।

एक ओर स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत बन रही है। यह अभियान जल संरक्षण और रोजगार सृजन का सफल समन्वय प्रस्तुत कर रहा है।

जनभागीदारी से बन रहा जनआंदोलन

कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासनिक निगरानी के साथ-साथ ग्रामीणों की सहभागिता भी इस अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बन रही है।

जब गांव अपने जल स्रोतों को स्वयं संरक्षित करने के लिए आगे आते हैं, तब विकास की प्रक्रिया अधिक टिकाऊ और प्रभावी बनती है। “मोर गांव, मोर तरिया” इसी सोच को साकार कर रहा है।

भविष्य की जल सुरक्षा की मजबूत नींव

आज निर्मित हो रही ये तरियां केवल जल संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की पूंजी हैं। वर्षा की प्रत्येक बूंद को सहेजने की यह पहल ग्रामीण विकास, कृषि समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के लिए दूरगामी परिणाम देने वाली साबित होगी।

बिलासपुर जिले में चल रहा मोर गांव, मोर तरिया अभियान यह संदेश देता है कि यदि जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बनाया जाए, तो गांव आत्मनिर्भर बन सकते हैं और विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। जल संरक्षण की यही सोच आज गांवों को संवार रही है और कल के सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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