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April 3, 2026 9:12 pm

जहां था डर और प्यास, वहां अब विकास: लखापाल बना नई उम्मीद की मिसाल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और जिला प्रशासन की मेहनत से खत्म हुआ जल संकट

रायपुर, 3 अप्रैल 2026। कभी नक्सल भय और पेयजल संकट से जूझता सुकमा जिले का दूरस्थ ग्राम लखापाल आज विकास की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक जहां ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब हर घर में नल से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है।

यह बदलाव केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ शासन की नियद नेल्लानार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हुआ है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में कोंटा विकासखंड के इस घोर नक्सल प्रभावित गांव में विकास की नई रोशनी पहुंची है।

जहां पानी के लिए थी जद्दोजहद, अब घर-घर बह रहा अमृत

जिला मुख्यालय सुकमा से लगभग 88 किलोमीटर दूर स्थित लखापाल गांव लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट की दोहरी मार झेलता रहा। गांव के 117 परिवार बोरिंग, कुएं और एक छोटे नाले पर निर्भर थे।

गर्मी के दिनों में जलस्तर गिरने से स्थिति और गंभीर हो जाती थी। महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज़ से पानी लाना पड़ता था, जिससे समय, श्रम और स्वास्थ्य—तीनों पर असर पड़ता था।

72 लाख की योजना ने बदला गांव का भविष्य

कार्यपालन अभियंता श्री विनोद कुमार राम के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायत लखापाल में 72.01 लाख रुपये की लागत से 4 सोलर पंप टंकियां स्थापित की गईं।

इसके माध्यम से 117 घरों में नल कनेक्शन दिए गए हैं। गांव की कुल जनसंख्या 465 है और अब सभी परिवारों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

महिलाओं की आंखों में राहत, चेहरे पर मुस्कान

गांव की निवासी श्रीमती लखे तेलाम बताती हैं कि पहले पानी के लिए काफी परेशानी होती थी। नाले और बोरिंग से पानी लाना पड़ता था, जिससे अक्सर बीमारियां भी फैलती थीं।

उन्होंने कहा, “अब घर में ही नल से पानी मिल जाता है। हमें बहुत राहत मिली है।” उनकी बातों में एक नए जीवन की उम्मीद झलकती है।

डर के साये से विकास की राह तक

गांव के निवासी तेलाम बुधु बताते हैं कि पहले गांव में भय का माहौल था। नक्सली गतिविधियां आम थीं और मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।

उन्होंने कहा कि अब हालात बदल गए हैं—

“पहले जहां नक्सलियों की बैठक होती थी, अब वहां पंचायत की बैठक विकास के लिए होती है। बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।”

स्वच्छ जल से स्वास्थ्य में सुधार

जल जीवन मिशन लागू होने के बाद गांव में जलजनित बीमारियों में कमी आई है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

अब सब्जी-बाड़ी से आत्मनिर्भरता

नल जल योजना के बाद ग्रामीणों ने अपने घरों के आसपास सब्जी उत्पादन शुरू किया है। टमाटर, मिर्च, बरबट्टी, सेमी और खट्टा भाजी उगाई जा रही है। इससे घरेलू जरूरतें पूरी होने के साथ बाजार पर निर्भरता भी कम हुई है।

प्रशासन ने इसे बताया बड़ी उपलब्धि

कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कहा कि लखापाल जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना प्रशासन की बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि जिले के सभी गांवों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी रहेगा।

ग्रामीणों ने जताया आभार

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनका जीवन आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक हो गया है।

लखापाल बना मिसाल

लखापाल गांव आज इस बात का उदाहरण बन गया है कि जब योजनाएं ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ लागू होती हैं, तो दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास संभव है।

अब यह गांव भय से मुक्त होकर आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर अग्रसर है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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