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April 2, 2026 8:14 pm

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में ओडिशा का दबदबा, पुरुष और महिला दोनों वर्गों में जीता स्वर्ण

रायपुर, 02 अप्रैल 2026।खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में ओडिशा ने हॉकी में अपना दबदबा कायम रखते हुए पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीत लिया। सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबलों में पुरुष टीम ने झारखंड को 4-1 से हराया, जबकि महिला टीम ने मिजोरम को 1-0 से शिकस्त दी।

पुरुष वर्ग में झारखंड को रजत और छत्तीसगढ़ को कांस्य पदक मिला। वहीं महिला वर्ग में झारखंड ने कांस्य हासिल कर पोडियम पूरा किया।

यह जीत सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनजातीय क्षेत्रों में हॉकी के बढ़ते प्रभाव और बदलती तस्वीर को भी दर्शाती है। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों के गांवों में हॉकी केवल खेल नहीं, बल्कि पहचान और अवसर का माध्यम बन चुकी है।

दशकों से जनजातीय समाज में बच्चे पेड़ों की टहनियों से स्टिक बनाकर मैदानों में खेलते रहे हैं। प्रतिभा हमेशा मौजूद रही, लेकिन उसे मंच नहीं मिल पाता था। अब खेलो इंडिया जैसी योजनाओं और बेहतर खेल संरचना के कारण यह तस्वीर तेजी से बदल रही है।

बिलासपुर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मुख्य कोच और 1992 बार्सिलोना ओलंपियन अजीत लकड़ा ने कहा कि ग्रासरूट से सीनियर स्तर तक खेल व्यवस्था मजबूत हो रही है, जिससे जनजातीय खिलाड़ियों को बड़ा लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अब प्रतिभाओं को सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिल रहा है, जिससे उनका प्रदर्शन निखर रहा है।

1984 लॉस एंजेलिस ओलंपियन मनोहर टोपनो ने भी इस पहल को सराहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन जनजातीय युवाओं को नई पहचान दे रहे हैं और भविष्य में यही खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

खेल मंत्रालय की ‘अस्मिता’ योजना के जरिए महिला खिलाड़ियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। साथ ही अब खेल विज्ञान, फिजियोथेरेपी और वीडियो विश्लेषण जैसी आधुनिक सुविधाएं दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं, जिससे खिलाड़ियों को पेशेवर माहौल मिल रहा है।

हॉकी इंडिया की सदस्य और पूर्व खिलाड़ी असृता लकड़ा ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों के खून में हॉकी बसती है। बेहतर सुविधाओं और एक्सपोजर के चलते अब वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

रायपुर में ओडिशा का यह स्वर्णिम प्रदर्शन एक बड़े बदलाव का संकेत है। बस्तर के धूल भरे मैदानों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम तक पहुंचते ये खिलाड़ी अब केवल प्रतिभागी नहीं, बल्कि चैंपियन और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय सितारे बन रहे हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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