
“एसएसपी विजय अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से विवेचकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रकरणों में गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित कर अपराध नियंत्रण में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकेंगे”

दुर्ग। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के नेतृत्व में दुर्ग पुलिस द्वारा एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रकरणों की विवेचना को मजबूत एवं प्रभावी बनाने के लिए ठोस पहल की गई है। इसी क्रम में रविवार को पुरानी पुलिस लाईन स्थित दधीचि प्रशिक्षण हाल में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एएसआई से लेकर निरीक्षक स्तर तक 65 विवेचकों ने भाग लिया।

एसएसपी आईपीएस विजय अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि एन.डी.पी.एस. एक्ट के मामलों में जप्ती, सैंपलिंग, चेन ऑफ कस्टडी और अन्य विधिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायालयीन अपेक्षाओं के अनुरूप साक्ष्य संकलन और सुदृढ़ दस्तावेजीकरण से ही प्रकरणों में प्रभावी अभियोजन संभव है।

प्रशिक्षण में एजीपी प्रकाश शर्मा ने केस स्टडी के माध्यम से विवेचना के विभिन्न पहलुओं को समझाया। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कसार और के.के. द्विवेदी ने न्यायालयीन दृष्टिकोण से साक्ष्य की स्वीकार्यता, दस्तावेजों की शुद्धता और तकनीकी त्रुटियों से बचने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

एफ.एस.एल. भिलाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी पंकज ताम्रकार ने नशीली टेबलेट एवं कैप्सूल प्रकरणों में सैंपलिंग प्रक्रिया, घटनास्थल पर त्रुटिरहित दस्तावेज तैयार करने और जप्त सामग्री को शीघ्र परीक्षण के लिए भेजने के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन दिया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मणिशंकर चन्द्रा ने धारा 50, 55, 57 एवं 29 एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रावधानों के पालन, जप्त माल की सुरक्षित अभिरक्षा तथा चेन ऑफ कस्टडी के संधारण पर विस्तार से जानकारी दी।
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