
“कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल ने कहा कि उल्लास योजना के माध्यम से बिलासपुर को पूर्ण साक्षर जिला बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। 40 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत ”

बिलासपुर, 22 मार्च 2026। जिले में ‘उल्लास’ योजना के अंतर्गत आयोजित साक्षरता आकलन परीक्षा ने जनभागीदारी के नए आयाम स्थापित किए हैं। जिले के चारों विकासखंडों सहित केंद्रीय जेल बिलासपुर में कुल 961 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 40,777 से अधिक असाक्षर प्रशिक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें 10,943 पुरुष एवं 29,822 महिलाएं शामिल रहीं। महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी इस अभियान की प्रमुख विशेषता रही, जिसे राज्य स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

जिले के सभी परीक्षा केंद्रों में आयोजन शांतिपूर्ण, पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। ‘उल्लास’ केंद्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय भाषा में पढ़ना-लिखना, आधारभूत गणित, डिजिटल साक्षरता एवं जीवनोपयोगी ज्ञान प्रदान किया गया, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।
कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल ने कहा कि उल्लास योजना के माध्यम से बिलासपुर को पूर्ण साक्षर जिला बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। 40 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।उन्होंने पूर्व में नागरिकों से इस अभियान में जुड़ने की अपील करते हुए सहभागिता हेतु आमंत्रण भी दिया था।

इस अभियान के अंतर्गत केंद्रीय जेल बिलासपुर में 100 पुरुष एवं 33 महिला बंदियों ने भी परीक्षा में भाग लेकर साक्षरता की दिशा में कदम बढ़ाया। ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर कोटा विकासखंड के आदिवासी अंचलों से बड़ी संख्या में सहभागिता दर्ज की गई। परीक्षा केंद्रों में सास-बहू, ननद-भौजाई, तीन पीढ़ियों के सदस्य, बुजुर्ग दंपति, नवविवाहित जोड़े, दिव्यांगजन तथा छोटे बच्चों के साथ परीक्षा देने पहुंची माताएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, जिससे यह अभियान एक सामाजिक उत्सव का रूप लेता नजर आया।

जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार उल्लास योजना के प्रभाव से जिले की साक्षरता दर में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी राज्य स्तर पर सराहना की गई है। यह पहल छत्तीसगढ़ को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। केंद्राध्यक्षों एवं पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के साथ ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर समन्वय समितियां सक्रिय रहीं। संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा विशेष ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए तथा जिला स्तर पर निरीक्षण दल गठित कर सतत निगरानी की गई।
इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, जनप्रतिनिधि, आजीविका मिशन की दीदियां एवं जागरूक नागरिकों के सहयोग से अधिकाधिक परीक्षार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई।
प्रधान संपादक


