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March 8, 2026 5:40 am

सियासी घेरेबंदी के बीच भूपेश का पलटवार,अंदर सवाल, बाहर हमला यही है भूपेश की रणनीति?

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक बार फिर सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में उनके राजनीतिक सफर ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में वे पुनः आक्रामक तेवर के साथ सामने आए हैं।

प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के कार्यकाल के बाद पार्टी को सत्ता में वापसी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। करीब 15 वर्षों तक विभिन्न कारणों से कांग्रेस सत्ता से दूर रही। वर्ष 2018 में जब कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई, उस समय भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। संगठन को मजबूती देने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया। इसके बाद वे मुख्यमंत्री बने और उनकी छवि एक जुझारू नेता के रूप में उभरी।

हालांकि सरकार के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन मंत्री टी.एस. सिंहदेव के साथ नेतृत्व को लेकर मतभेदों की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में रहीं। इन घटनाक्रमों के बीच पार्टी नेतृत्व और विशेषकर राहुल गांधी के साथ संबंधों को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगती रहीं। यद्यपि इन मुद्दों पर आधिकारिक रूप से कभी स्पष्ट बयान सामने नहीं आया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे उनकी छवि पर असर पड़ा।

वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा। चुनावी हार के बाद संगठन में जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर भी चर्चाएं हुईं। भूपेश बघेल को न तो पुनः प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और न ही नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसे भी राजनीतिक हलकों में विभिन्न नजरियों से देखा गया।

इसी दौरान उनके कुछ निकट सहयोगियों पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामले दर्ज हुए। उनके पुत्र के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हुई, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया। इन घटनाओं ने विरोधी दलों को सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री पर सवाल उठाने का अवसर दिया।

इसके बावजूद वर्तमान में भूपेश बघेल प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं और भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नीतियों पर लगातार हमला बोल रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उनकी सक्रियता उन्हें पार्टी नेतृत्व के सामने एक बार फिर प्रभावी नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश का संकेत देती है।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में आगे की परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं, यह आने वाला समय तय करेगा, लेकिन फिलहाल भूपेश बघेल ने संकेत दे दिए हैं कि वे विपक्ष की राजनीति में पूरी मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभाने को तैयार हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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