चंद्रग्रहण के कारण होली की तिथि में परिवर्तन-सुभाष शर्मा ज्योतिषी
बिलासपुर। फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर मनाए जाने वाले होलिका दहन एवं होली पर्व को लेकर इस वर्ष तिथि व ग्रहण की स्थिति के कारण विशेष निर्णय सामने आया है। ज्योतिषाचार्य सुभाष शर्मा (एस्ट्रो वरेण्यम) के अनुसार सभी गणनाएं भारतीय मानक समय के आधार पर की गई हैं।
सुभाष शर्मा ज्योतिषी ने बताया कि पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को सायं 5:56 बजे प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को सायं 5:08 बजे तक रहेगी। वहीं भद्रा काल 2 मार्च को सायं 5:56 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च को प्रातः 5:32 बजे तक व्याप्त रहेगा।
शास्त्रों में “प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा” में ही होलिका दहन का विधान बताया गया है। प्रदोष काल सामान्यतः सूर्यास्त से लगभग 48 मिनट तक माना जाता है। इस आधार पर 2 मार्च 2026 को ही प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि उपलब्ध है। किंतु उसी समय भद्रा भी विद्यमान रहेगी।
धर्मशास्त्रीय मतानुसार यदि भद्रा अर्धरात्रि तक रहे तो भद्रा मुख को त्यागकर भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन किया जा सकता है। अतः 2 और 3 मार्च की मध्यरात्रि में 1:26 बजे से 2:38 बजे के मध्य होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत एवं श्रेष्ठ रहेगा।
चंद्रग्रहण का निर्णय
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, मंगलवार 3 मार्च 2026 को दोपहर 3:20 बजे से सायं 6:47 बजे तक सिंह राशि एवं पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में ग्रस्तोदय एवं खंडग्रास चंद्रग्रहण रहेगा। यह ग्रहण राजस्थान एवं गुजरात के पश्चिमी भाग के कुछ स्थानों को छोड़कर अधिकांश भारत में दृश्य होगा।
ग्रहण का विवरण इस प्रकार है—
• ग्रहण प्रारंभ: 3:20 बजे
• खग्रास प्रारंभ: 4:35 बजे
• ग्रहण मध्य: 5:04 बजे
• खग्रास समाप्त: 5:33 बजे
• ग्रहण समाप्त: 6:47 बजे
ग्रहण का कुल पर्वकाल 3 घंटे 27 मिनट रहेगा। चंद्रग्रहण का सूतक सामान्यतः 9 घंटे पूर्व से प्रारंभ माना जाता है, किंतु ग्रस्तोदय ग्रहण की स्थिति में सूर्योदय से ही सूतक मान्य होता है।
4 मार्च को मनाई जाएगी होली
सामान्य परंपरा के अनुसार होलिका दहन के अगले दिन धुलेंडी या रंगोत्सव मनाया जाता है। किंतु 3 मार्च को ग्रहण का सूतक होने के कारण होली पर्व अथवा वसंतोत्सव 4 मार्च 2026 को मनाना उचित रहेगा।ज्योतिषाचार्य सुभाष शर्मा ने श्रद्धालुओं से शास्त्रोक्त समयानुसार पर्व मनाने की अपील की है, जिससे धार्मिक मर्यादा और परंपरा का पालन सुनिश्चित हो सके।
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