सरकार,मंत्री और कलेक्टर, ये तो विडंबना है
विधानसभा सत्र के दौरान एक अजीबो-गरीब वाकया देखने और सुनने में आया। उद्योग मंत्री सीएसआर फंड के उपयोगिता को लेकर विधायक को उनके सवालों का जवाब दे रहे थे। मंत्री ने बातों ही बातों में बताया, उनके भी तीन काम है, जो ऑनवर्किंग है। यह बताकर पता नहीं मंत्री क्या कहना चाहते थे या फिर क्या बताना चाहते थे। सवाल-जवाब के बाद मंत्रीजी ने जो कुछ बोला और सदन में जिसने भी सुना अवाक रह गए। मंत्रीजी ने कहा कि वे कलेक्टर को नहीं बोल सकते, उनकी इच्छा है फंड को कैसे ऑपरेट करते हैं। बस फिर क्या था,सदन गरम हो गया। पूर्व सीएम ने मुद्दा उठा ही दिया। सवाल उठा, कलेक्टर बड़े या मंत्री या फिर सरकार। उलझन बढ़ने लगी है, मंत्री की और डीएम के पद पर बैठने वालों की। जाहिरतौर पर मानकर चलिए आने वाले दिनों में यह बहस का मुद्दा बनेगा। तब आप और हम दोनों शामिल होंगे। तब तक के लिए वेट एंड सी।
विधानसभा का बजट सेशन और छुट्टियां कैंसिल
विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। विभागीय अफसरों से लेकर मातहतों के छुट्टी पर एक तरह से ब्रेक लगा हुआ है। यह सिलसिला अभी जारी रहेगा। सत्र के बीच पता नहीं विधायकों के द्वारा क्या सवाल खड़ा कर दिया जाए और विधानसभा से कब और कितने समय ईमेल धमक जाए। ईमेल को छोड़िए डायरेक्ट फोन और कुछ ही मिनटों में पूरी जानकारी विधानसभा तक पहुंचाने का टाइम लिमिट। इसी आपाधापी में अफसर और मातहत इन दिनों थोड़े दुबले हो रहे हैं। दिन और रात बस एक ही चिंता, पता नहीं कब फोन और ईमेल आ जाए। चिंता जवाब देने से ज्यादा अपनी की भी तो है। भीतर-भीतर चूहे बनकर कुतरने वालों की चिंता कुछ ज्यादा ही बढ़ी हुई है।
फूड डिपार्टमेंट का मोटा चूहा
अभी तक कवर्धा में ही मोटे चूहे और दीमक की बात हो रही थी। कवर्धा को छोड़िए न्यायधानी भी मोटे और कुतरने वाले चूहों की कमी नहीं है। कलेक्टोरेट कैंपस को याद करिए। कैंपस में कार्नर की ओर दो मालदार डिपार्टमेंट है। एक फूड और दूसरा माइनिंग। माइनिंग में क्या कुछ चलता है या फिर चल रहा है, यह बताने की जरुरत नहीं है। फूड में भी बरसों बरस से एक ही कल्चर हावी है। करप्श्न कल्चर। इसका जीता-जागता उदाहरण भी कुछ दिनों पहले देखने को मिला जब मस्तूरी इलाके काे संभाल रहे एक फूड इंस्पेक्टर का घूसखोरी का कारनामा जगजाहिर हुआ। वो तो एसीबी का भला हो, जिन्होंने शिकायतों को गंभीरता से लिया और घूसखोर अफसर को रंगेहाथों नोटों के साथ अरेस्ट कर लिया। यह तो शिकायत के बाद सामने आ गया और एसीबी ने धर लिया, अंदाजा लगाइए, ऐसे कितने मोटे चूहे हैं जो सिस्टम को भीतर ही भीतर कूतर रहे हैं और ऊफ तक नहीं कर रहे हैं।
अपराध,आरोपी और सिस्टम
शहर में जिस रफ्तार से क्राइम का ग्रॉफ बढ़ रहा है,उससे भी तेजी के साथ पुलिस का सिस्टम अपडेट हो रहा है। शहर में रहने वाले अपराधियों के तार यूपी से लेकर बिहार और ना जाने किस-किस राज्यों के अपराधियों से जुड़े हुए हैं। हाल के दिनों में जो कुछ देखने और सुनने में आया इससे चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। यहां तो अपराधी उलटी गंगा बहाने में लगे हैं। मेहनत मशक्कत से कामकाज करने वाले भी इनकी आंखों की किरकिरी बने हुए हैं। मिशन स्कूल रोड के होटल व्यवसायी से लेकर राजकिशोर नगर के ज्वेलर्स के साथ जो कुछ हुआ वह वाकई परेशान करने वाली बात है। इनकी खुद की मेहनत मशक्कत अपराधियों से देखी नहीं जा रही है। पुलिस के आला अफसरों की दाद देनी होगी, सिस्टम के अपडेशन के चलते अपराधियों की धरपकड़ करने में सफलता पाई साथ ही जिलेवासियों को यह संदेश देने में भी कामयाब रहे हैं कि आप चिंता मत करिए हम हैं ना। निश्चित रूप से पुलिस की इस कामयाबी के लिए तारीफ तो बनती है।
अटकलबाजी
भाजपा नेता व पार्षद की सुपारी देने वाले की करतूत तो सामने आ ही गई, जरा पता करिए और कितने लोग ऐसे हैं जो दूसरों की बुलंदी से जलभून रहे हैं और यूपी बिहार के कांटेक्ट के जरिए सुपारी जैसी डिलिंग करने में लगे हैं।
होली भी नजदीक आ रही है, खास डिपार्टमेंट से लेकर दफ्तरों में भीड़ जुटेगी,अफसर और मातहत कैसे मैनेज करेंगे। विधानसभा का सत्र भी है, दफ्तर छोड़कर जा नहीं सकते। आप ही कुछ टिप्स दे दीजिए, जिससे ये बचे रहें।
प्रधान संपादक


