वर्धा महाराष्ट्र ।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में घेंट विश्वविद्यालय, बेल्जियम के इंडोलॉजी विभाग के प्राध्यापक लेओ वन क्लैननब्रूगल ने बेल्जियम में भारत की छवि विषय पर आयोजित व्याख्यान में कहा कि बेल्जियम में हिंदी के महान कथाकार प्रेमचंद और सआदत हसन मंटो का गहरा प्रभाव है। उन्होंने कहा कि भारतवासियों के आतिथ्य भाव ने उन्हें अत्यंत प्रभावित किया है।

अपने संबोधन में लेओ वन ने विद्यार्थियों से बेल्जियम में हिंदी के प्रचार-प्रसार, हिंदी धारावाहिकों और फिल्मों के वैश्विक प्रभाव, जनसंचार माध्यमों की स्वतंत्रता जैसे विषयों पर खुलकर संवाद किया। उन्होंने बताया कि घेंट विश्वविद्यालय के इंडोलॉजी विभाग में बेल्जियम तथा वहां बसे भारतीय विद्यार्थी हिंदी का अध्ययन करते हैं।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने हिंदी के प्रति अपने लगाव का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दलाई लामा के व्याख्यान की एक कैसेट उन्हें एक मित्र से उपहार में मिली थी, जिसके माध्यम से वे हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने कहा कि हिंदी पढ़ने से दुनिया को देखने का एक नया दृष्टिकोण मिलता है। हिंदी साहित्य में वह शक्ति है, जो भाषा के साथ-साथ संस्कृति का भी परिचय कराती है।
लेओ वन ने भाषाओं की विविधता के सम्मान का आह्वान करते हुए हिंदी के भविष्य को लेकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गिटार पर हिंदी और जर्मन भाषा के गीत भी प्रस्तुत किए।

ग़ालिब सभागार में आयोजित इस व्याख्यान में साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने अतिथि वक्ता का परिचय कराया। भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर ने श्री लेओ वन को सुतमाला एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर हिंदी साहित्य विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रूपेश कुमार सिंह, डॉ. कोमल कुमार परदेशी, जनसंपर्क अधिकारी बी.एस. मिरगे सहित हिंदी साहित्य, जनसंचार, प्रदर्शनकारी कला, इतिहास और शिक्षा विभागों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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