दुर्ग छत्तीसगढ़।दुर्ग जिला पुलिस द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से गुरुवार को बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों के लिए रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सिविक सेंटर भिलाई स्थित सीए बिल्डिंग में प्रातः 10:30 बजे से आयोजित इस कार्यशाला में किशोर न्याय बालकों की देखरेख एवं संरक्षण अधिनियम 2015 तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों पर पुलिस अधिकारियों को व्यवहारिक एवं विधिसम्मत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यशाला में बाल संरक्षण से संबंधित प्रकरणों में प्राथमिकी पंजीयन, बाल पीड़ितों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया, चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग के सिद्धांत, किशोर विधि विरुद्ध बालकों के अधिकार, जे.जे. एक्ट के प्रपत्रों का उपयोग, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुतिकरण, चिकित्सीय परीक्षण, परामर्श एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। केस स्टडी के माध्यम से विवेचना के दौरान आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों एवं उनके समाधान पर भी चर्चा की गई।कार्यक्रम में जिला कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं तथा उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना प्रशासन, पुलिस एवं समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रशिक्षण से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत होगा, जिससे किशोर न्याय से जुड़े मामलों में विवेचना एवं न्यायिक प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी।
एसएसपी आईपीएस अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक प्रकरण में पुलिस अधिकारियों को विशेष संवेदनशीलता, गोपनीयता एवं विधिक प्रावधानों का अक्षरशः पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई एवं संबंधित विभागों के साथ समन्वय के माध्यम से ही पीड़ित बालकों को त्वरित न्याय दिलाया जा सकता है।
कार्यशाला के सफल आयोजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती ममता देवांगन सीएसपी डॉ. चित्रा वर्मा महिला थाना स्टाफ पुलिस लाइन एवं प्रशिक्षण शाखा के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहनीय भूमिका रही।

कार्यक्रम में किशोर न्याय बोर्ड आरपीएफ जीआरपी जिला बाल संरक्षण इकाई बाल संप्रेक्षण गृह, परिवीक्षा अधिकारी, बाल कल्याण अधिकारी चाइल्ड हेल्पलाइन केस वर्कर एवं स्कूल शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सभी विभागों ने बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने हेतु समन्वित प्रयासों पर बल दिया।
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