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February 2, 2026 2:32 pm

हाई कोर्ट ने कहा, एनआईए कोर्ट में होगी नकली नोट से जुड़े अपराध की सुनवाई

बिलासपुर। जस्टिस बीडी गुरु ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, नकली नोटों के अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार NIA कोर्ट को है। ऐसे मामलों का ट्रायल एनआईए कोर्ट में ही हो सकता है। संशोधन को लेकर स्थिति साफ करते हुए जस्टिस गुरु ने कहा कि संशोधन ने क्रम में बदलाव हुआ है, क्षेत्राधिकार में नहीं। पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या व्यवस्था दी है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गुरु ने महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ का निपटारा करते हुए साफ कहा है, नकली नोटों से संबंधित अपराध का विचारण केवल एनआईए के स्पेशल कोर्ट में ही किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि भले ही अपराध 2019 के संशोधन अधिनियम से पहले घटित हुआ हो। नकली नोट के अपराध से जुड़ा मामला छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का है। नकली नोट चलाते पकड़े गए आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 489-ए, 489-बी, 489-सी और 489-डी (जाली नोट) के तहत जुर्म दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई एनआईए के स्पेशल कोर्ट में हुई। प्रकरण की सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने प्रकरण को जिला एवं सत्र न्यायालय जांजगीर-चांपा रिफर कर दिया। प्रकरण वापस करने के पीछे स्पेशल कोर्ट ने कारण बताते हुए कहा, जाली नोटों से जुड़ा यह अपराध NIA संशोधन अधिनियम 24. जुलाई.2019 के लागू होने से पहले का है। लिहाजा स्पेशल कोर्ट को इस प्रकरण की सुनवाई का अधिकार नहीं है। स्पेशल कोर्ट द्वारा केस जांजगीर-चांपा जिला एवं सत्र न्यायालय वापस भेजे जाने के बाद सत्र न्यायाधीश ने प्रकरण की जानकारी देते हुए हाई कोर्ट से राय मांगी थी।

0 हाई कोर्ट ने दी इस तरह की व्यवस्था
जस्टिस बीडी गुरु ने कहा, आईपीसी की धारा 489-ए से 489-ई तक के प्रावधान NIA अधिनियम, 2008 की स्थापना के समय से ही ‘अनुसूचित अपराध’ की श्रेणी में था। 2019 के संशोधन में केवल अनुसूची के क्रम में बदलाव किया गया है, क्षेत्राधिकार में नहीं। सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा है, NIA अधिनियम की धारा 22 (1) और 22(4) के तहत, राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष न्यायालय को ही ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि चूंकि एनआईए स्पेशल कोर्ट में 8 गवाहों के बयान पहले ही दर्ज हो चुके हैं, लिहाजा जहां से सुनवाई रुकी थी, वहीं से इसे दोबारा प्रारंभ किया जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा, नए सिरे से सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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