
राजपत्र की जनरल कंडीशन बनी बहस का आधार, पर्यावरणीय नियमों की व्याख्या को लेकर छिड़ा विवाद
रामसर साइट के आसपास संचालित उद्योगों और कोयला भंडारण स्थलों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना में उल्लेखित 10 किलोमीटर की सीमा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। अब कलेक्टर कार्यालय सहित संबंधित विभागों को स्पष्ट जवाब का इंतजार है कि संवेदनशील क्षेत्र के आसपास उद्योगों के संचालन को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक पत्रकार ने रामसर साइट के आसपास संचालित उद्योगों और कोयला भंडारण स्थलों पर सवाल उठाते हुए विभिन्न विभागों को पत्र भेजे। उनका दावा है कि पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास औद्योगिक गतिविधियों को लेकर कड़े प्रावधान हैं और इनका पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

इस बीच सामने आए भारत सरकार के राजपत्र (गजट नोटिफिकेशन) ने चर्चा को नई दिशा दे दी है। अधिसूचना की जनरल कंडीशन (GC) में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि कोई परियोजना या गतिविधि संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र, इको-सेंसिटिव क्षेत्र अथवा अन्य अधिसूचित संवेदनशील क्षेत्रों की सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर स्थित है, तो उसे विशेष पर्यावरणीय परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया के दायरे में माना जा सकता है। इसी प्रावधान को आधार बनाकर अब उद्योगों की स्थिति और उनकी पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि इस विषय पर सभी पक्ष एकमत नहीं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि अधिसूचना में 10 किलोमीटर के दायरे में अतिरिक्त पर्यावरणीय परीक्षण और स्वीकृति की बात कही गई है, जबकि उद्योगों को बंद करने या स्थानांतरित करने संबंधी निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकरणों के निर्देशों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यही कारण है कि नियमों की अलग-अलग व्याख्या के चलते विवाद और बहस का दौर जारी है।
सूत्रों के अनुसार मामले में कलेक्टर खनिज विभाग द्वारा भी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है। कलेक्टर कार्यालय भी विभागीय जवाब का इंतजार कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रामसर साइट के आसपास संचालित उद्योगों और कोयला भंडारण स्थलों पर कौन-कौन से नियम प्रभावी हैं और भविष्य में किस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक हो सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम पर केवल प्रशासन और उद्योग जगत ही नहीं, बल्कि कई अन्य हितधारकों की भी नजर टिकी हुई है। सभी को इंतजार है कि विभागों से आने वाला जवाब क्या दिशा तय करता है और इसका प्रभाव किन-किन गतिविधियों पर पड़ता है।
फिलहाल रामसर साइट के 10 किलोमीटर दायरे में उद्योगों के संचालन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। विभागीय स्पष्टीकरण और प्रशासनिक निर्णय आने तक बहस, दावे और प्रतिदावे जारी रहने की संभावना बनी हुई है। अब सबकी निगाहें उस आधिकारिक जवाब पर हैं, जो इस पूरे विवाद की दिशा और दशा दोनों तय करेगा।
प्रधान संपादक


